
नीमडीह, 31 मार्च : सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत नीमडीह थाना क्षेत्र के तिल्ला टोला जामडीह गांव में बीती रात जंगली हाथियों का उत्पात एक बार फिर सामने आया, लेकिन इस बार सवाल सिर्फ हाथियों पर नहीं, बल्कि वन विभाग की लापरवाही पर भी खड़े हो गए हैं।
रात के अंधेरे में हाथियों के झुंड ने गांव में घुसकर राशन दुकानदार मदन दास के घर को तोड़ डाला। उनकी दुकान में रखे आटा, आलू समेत खाद्य सामग्री को खा लिया गया, वहीं कंप्यूटर और वजन मशीन को भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
हाथियों का कहर यहीं नहीं रुका, गांव के ही सनातन सिंह की दुकान को भी निशाना बनाया गया, जहां रखे आलू को चट कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है। बार-बार हाथियों के हमले हो रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से न तो कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही हाथियों की आवाजाही को रोकने के लिए कोई प्रभावी योजना बनाई गई है।
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व जिला परिषद सदस्य अनिता पारित मौके पर पहुंचीं और हालात का जायजा लिया। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से फोन पर बात कर तत्काल मुआवजे की मांग की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा।
गांव में दहशत का माहौल है, लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते वन विभाग ने सतर्कता दिखाई होती, तो शायद यह नुकसान टाला जा सकता था।
लगातार हो रही घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि हाथियों का यह ‘आतंक’ अब सिर्फ प्राकृतिक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।



