रिट याचिका की सुनवाई में जेएनएसी पर कड़ा रुख, आवश्यक सूचनाएँ तीसरी बार नहीं देने पर अदालत ने जताई नाराजगी

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रिट याचिका की सुनवाई में जेएनएसी पर कड़ा रुख, आवश्यक सूचनाएँ तीसरी बार नहीं देने पर अदालत ने जताई नाराजगी

रांची, 26 नवंबर : झारखंड हाई कोर्ट में आज रिट याचिका संख्या 2078/2018 (राकेश झा बनाम झारखंड सरकार) की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी (जेएनएसी) के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई।

अदालत ने पहले ही जेएनएसी को निर्देश दिया था कि वह शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करे— अवैध पार्किंग कब्जाधारियों और अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। किन-किन भवनों को कम्पलीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया और किन्हें नहीं।

जिन इमारतों को कम्पलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला, उन्हें बिजली–पानी का कनेक्शन कैसे मिला, तथा वे उपभोक्ता सामान्य दर पर भुगतान करते हैं या वाणिज्यिक दर पर।

लेकिन आज तीसरी बार भी जेएनएसी इन बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी कोर्ट को उपलब्ध नहीं करा सका, जिसे अदालत ने सीधी अवमानना के रूप में गंभीरता से लिया।

सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता ने यह कहा कि विभाग अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चला रहा है, जुर्माना वसूला गया है और टाटा स्टील/जुस्को को पत्र लिखकर पूछा गया है कि बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट बिजली–पानी का कनेक्शन क्यों दिया गया। इस पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा— “जब टाटा स्टील/जुस्को को नगरपालिका कानूनों की जानकारी थी, तो अवैध भवनों की बिजली–पानी काटी क्यों नहीं गई? और जेएनएसी ने उन्हें इस संबंध में पत्र कब लिखा?”

अधिवक्ता इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के वकीलों से उनके रीज्वाइंडर दाखिल करने की समयसीमा पूछी। पिटीशनर की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल ने तीन दिनों का समय मांगा, लेकिन अदालत ने 7 दिन का समय निर्धारित किया। अदालत ने यह भी कहा कि पिटीशनर का हलफनामा दाखिल होते ही मामले की पुनः सुनवाई होगी।

इस पूरी प्रक्रिया में कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया कि जेएनएसी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और मांगी गई सभी सूचनाएँ टेबुलर फॉर्म में उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

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