
बाघमुंडी, 31 मार्च : पश्चिम बंगाल के बाघमुंडी के कालिमाटी में आयोजित 12वां विशाल सरहुल महोत्सव इस बार सिर्फ एक पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का सशक्त प्रदर्शन बनकर उभरा। तेज बारिश के बावजूद जिस तरह लोगों की भागीदारी देखने को मिली, उसने इस उत्सव को और भी खास बना दिया।
मानवम आदिवासी भूमिज मुंडा कल्याण समिति की बाघमुंडी प्रखंड कमेटी के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव को पश्चिम बंगाल आदिवासी भूमिज मुंडा कल्याण समिति की पुरुलिया जिला इकाई और विभिन्न आदिवासी समुदायों का व्यापक सहयोग मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल माता की पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वजारोहण और महान जननायक बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
महोत्सव में सांस्कृतिक विविधता की अनूठी झलक देखने को मिली, जहां दूर-दराज से आए नृत्य दलों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से अपनी विरासत को जीवंत कर दिया। संगीत प्रस्तुतियों, स्वागत भाषण और सामाजिक चर्चा सभा ने कार्यक्रम को और भी समृद्ध बनाया।
खास बात यह रही कि खराब मौसम के बावजूद हजारों की संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर जुटे रहे। आदिवासी समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों की उपस्थिति ने इसे सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बना दिया।
इस अवसर पर समिति के संचालक सुरेश सिंह बाबू, अध्यक्ष सुधीर सिंह सरदार, कोषाध्यक्ष मोहर सिंह मुड़ा, बुद्धेश्वर सिंह मुड़ा सहित कार्तिक सिंह मुड़ा, अखिल सिंह सरदार और जिला व राज्य स्तर के कई प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।
बारिश के बीच भी उत्साह से भरा यह आयोजन इस बात का प्रमाण रहा कि जब बात परंपरा और पहचान की हो, तो कोई भी बाधा लोगों के जज्बे को रोक नहीं सकती।



