करम आखड़ा झारखंडी अस्मिता और संस्कृति की जीवंत पहचान : सुदेश महतो
रांची, 29 सितंबर : टाटीसिलवे स्थित ईईएफ मैदान में आयोजित करम आखड़ा महोत्सव में आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कलाकारों और कलाप्रेमियों के साथ करम पर्व की खुशियों में सहभागिता की और पारंपरिक गीत-संगीत एवं नृत्य का आनंद लिया।
मांदर की थाप, नगाड़े की गूंज, लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य से पूरा परिसर झारखंडी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कलाकार और कलाप्रेमी शामिल हुए।
सुदेश महतो ने कहा कि करम केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, परंपरा, लोकआस्था और झारखंडी जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संस्कृति ही समाज की पहचान होती है और अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना स्वाभिमान की रक्षा के समान है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की लोकसंस्कृति में हर बोली में संगीत और हर चाल में नृत्य की झलक मिलती है। आधुनिकता के दौर में भी मांदर की थाप, नगाड़े की गूंज और लोकगीतों की मिठास झारखंड की सांस्कृतिक आत्मा को जीवंत बनाए हुए है।
सुदेश महतो ने कहा कि लोकसंस्कृति के संरक्षण का अर्थ केवल परंपराओं को संजोकर रखना नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, विरासत और झारखंडी अस्मिता से जोड़ना भी है।
महोत्सव में विशिष्ट अतिथि पद्मश्री मुकुंद नायक सहित हजारों कलाकार एवं कलाप्रेमी मौजूद रहे। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को झारखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।



