आदित्यपुर EWS कॉलोनी के 216 परिवारों की ‘मकान मालिकाना हक’ लड़ाई फिर तेज—CM हेमंत सोरेन से मिले मनमोहन सिंह, 45 साल पुराने इंतजार को खत्म करने की मांग

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आदित्यपुर EWS कॉलोनी के 216 परिवारों की ‘मकान मालिकाना हक’ लड़ाई फिर तेज—CM हेमंत सोरेन से मिले मनमोहन सिंह, 45 साल पुराने इंतजार को खत्म करने की मांग

आदित्यपुर, 12 दिसंबर : ईडब्ल्यूएस कॉलोनी के 216 परिवारों को उनके घरों का मालिकाना हक दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ चुकी है। वार्ड 29 की दिवंगत पार्षद राजमणि देवी के पुत्र मनमोहन सिंह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात कर 45 वर्षों से लंबित इस मुद्दे को दोहराया।

मनमोहन सिंह ने बताया कि झारखंड राज्य आवास बोर्ड ने वर्ष 1980 में आदित्यपुर में 216 ईडब्ल्यूएस आवासों का आवंटन किया था। तब से लगातार परिवार वहीं निवास कर रहे हैं, लेकिन मालिकाना हक का मुद्दा आज भी अधूरा है।

इसके विपरीत, इसी इलाके के एस-टाइप, आई-टाइप, आर-टाइप, एम-टाइप और जनता फ्लैट के लाभुकों को Hire Purchase Agreement के तहत अधिकार मिल चुके हैं, जबकि EWS परिवार हर साल इसी उम्मीद में गुजार रहे हैं कि उनका भी स्थायी मालिकाना हक सुनिश्चित होगा।

बिना स्पष्ट सूचना के विभाग का सर्वे, निवासियों में चिंता बढ़ी

उन्होंने बताया कि विभागीय मंत्री द्वारा पहले भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ठोस कदम आज तक नहीं उठाए गए। इसी बीच विभाग द्वारा कॉलोनी में अचानक सर्वे शुरू कर दिया गया, जिससे लोगों में भय और असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई।

स्थानीय अखबारों में 5.50 लाख रुपये की देनदारी नोटिस जारी होने का दावा भी किया गया, जबकि कॉलोनी के किसी भी परिवार को ऐसा नोटिस नहीं मिला है।

गरीब परिवार पुनर्विकास मॉडल की लागत नहीं उठा सकते: मनमोहन

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कहा कि सभी 216 परिवार गरीब और अल्प आय वर्ग से हैं, जो पुनर्विकास मॉडल की भारी लागत वहन नहीं कर सकते। उन्होंने मांग की कि पहले दिए गए आश्वासनों के अनुरूप इन परिवारों को भी Hire Purchase Agreement योजना के तहत उनके मौजूदा घरों पर मालिकाना हक दिया जाए।

“45 साल से एक ही घर में रह रहे लोग अब सुरक्षा चाहते हैं”

उन्होंने कहा कि यह कदम केवल नीतिगत न्याय ही नहीं, बल्कि हजार से अधिक लोगों को स्थायी सुरक्षा प्रदान करेगा, जो दशकों से उसी स्थान को अपना घर मानकर रह रहे हैं।

इस मुलाकात के दौरान ईचागढ़ विधायक सविता महतो और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य काबलू महतो भी मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों ने आशा जताई कि सरकार इस बार संवेदनशील व सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे उनकी 45 वर्षीय प्रतीक्षा का अंत हो सके।

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