झारखंड नेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025: तीसरे दिन सिनेमा के classroom बने कॉलेज और ऑडिटोरियम, युवाओं ने सीखी फिल्म मार्केटिंग की नई भाषा

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झारखंड नेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025: तीसरे दिन सिनेमा के classroom बने कॉलेज और ऑडिटोरियम, युवाओं ने सीखी फिल्म मार्केटिंग की नई भाषा

जमशेदपुर, 12 दिसंबर : झारखंड नेशनल फिल्म फेस्टिवल (JNFF 2025) का तीसरा दिन ज्ञान, कला और रचनात्मकता का अनोखा मेल रहा। जहां एक ओर स्क्रीन पर कहानियाँ जीवंत हो उठीं, वहीं दूसरी ओर युवाओं ने फ़िल्म मार्केटिंग के नए आयाम सीखकर अपने सपनों को दिशा दी।

करीम सिटी कॉलेज बना भावनाओं और विचारों का सिनेमाई केन्द्र

तीसरे दिन करीम सिटी कॉलेज में सिल्क कॉफिन, थे योगी, गिफ्ट, द फर्स्ट फिल्म और एंड ऑफ 14 डेज जैसी प्रभावशाली फिल्मों की स्क्रीनिंग हुई। हर फिल्म ने दर्शकों को विभिन्न भावनात्मक और सामाजिक पहलुओं से जोड़ते हुए नई सोच देने का काम किया।

माइकल जॉन ऑडिटोरियम में सजी संवेदनाओं की शाम

बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में प्रदर्शित पैगाम, दर्द अपनों का, सैंग, ठंडी चाय और जाना रे जैसी फिल्मों ने दर्शकों को अपनी कहानी और प्रस्तुति से बांधे रखा। इन फिल्मों ने रिश्तों, संघर्षों और सामाजिक यथार्थ को अलग अंदाज में पेश किया।

फिल्म मार्केटिंग वर्कशॉप ने बढ़ाया युवाओं का आत्मविश्वास

फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण रहा फिल्म मार्केटिंग पर केंद्रित विशेष वर्कशॉप। विशेषज्ञ नेहा तिवारी ने फिल्म प्रमोशन, पब्लिसिटी रणनीतियों और दर्शक-सम्प्रेषण जैसी महत्वपूर्ण बातों पर युवाओं को मार्गदर्शन दिया। JNFF के फाउंडर संजय सतपथी ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल फिल्म दिखाना नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को सीखने का मंच देना भी है। यह वर्कशॉप उसी सोच का हिस्सा है।”

टीम की रचनात्मक ऊर्जा से निखरा कार्यक्रम

फेस्टिवल की सफलता में क्रिएटिव टीम—शालिनी प्रसाद, शिवांगी सिंह, राज डोगर, जोयशी गोराई, कशिश जैन, सृष्टि रे, कोमल कुमारी, सृष्टि सुमन और श्रुति सोय—का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

दर्शकों और प्रतिभागियों ने JNFF 2025 के तीसरे दिन को “सीख और मनोरंजन का अनोखा संगम” बताते हुए इसकी खूब सराहना की।

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