दहेज पीड़िता से रिश्वत मांगने वाले कदमा थाना के एसआई पर गिरी गाज़ — निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश

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जमशेदपुर, 13 जून : दहेज उत्पीड़न की शिकायत लेकर कदमा थाना पहुंची एक पीड़िता को न्याय की आस में ऐसा झटका लगा, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। आरोप है कि कदमा थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सुनील कुमार दास ने प्राथमिकी दर्ज करने के बदले पीड़िता से एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। मामले के उजागर होते ही जिले में हड़कंप मच गया।

पीड़िता ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कोल्हान डीआईजी और वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से की थी। त्वरित संज्ञान लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय ने आरोपी एसआई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है तथा विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। एसएसपी के निर्देश पर सिटी एसपी कुमार शिवाशिष ने पीड़िता की शिकायत पर जांच की और जांच रिपोर्ट एसएसपी को सौंपा था। उक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने एसआई सुनील कुमार दास को निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला :

जानकारी के अनुसार पीड़िता का विवाह दो वर्ष पूर्व हुआ था। विवाह के कुछ ही समय बाद से उस पर लगातार दहेज की मांग को लेकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाने लगी। अत्याचार से तंग आकर पीड़िता ने कानूनी सहायता लेने का निर्णय लिया और कदमा थाना पहुंची। वहां उसने जब एसआई से अपनी पीड़ा साझा की, तो उन्होंने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की।

पीड़िता ने बताया, “मुझे लगा कि पुलिस मेरी मदद करेगी, लेकिन वहां भी मुझसे पैसे मांगे गए। यह अत्यंत पीड़ाजनक है। मैंने तुरंत इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से की।”

मामला सामने आने के बाद वरीय पुलिस अधीक्षक ने तत्परता दिखाते हुए संबंधित एसआई को निलंबित कर दिया और विभागीय जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। पुलिस मुख्यालय से भी रिपोर्ट तलब की गई है।

एसएसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “महिला सुरक्षा एवं सम्मान सरकार की प्राथमिकता है। अगर पुलिस पदाधिकारी ही पीड़ितों का शोषण करेंगे, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।”

इस घटना को लेकर महिला आयोग, महिला मोर्चा एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त है। सभी ने एक सुर में इस कृत्य की निंदा करते हुए एसआई को बर्खास्त करने की मांग की है। महिला संगठन की एक प्रतिनिधि ने कहा कि “पुलिस थाने महिलाओं की सुरक्षा का स्थान होना चाहिए, न कि उत्पीड़न का केंद्र। यह विश्वास तोड़ने वाली घटना है।”

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