रात के अंधेरे में बालू परिवहन : वैधता के दावे और अवैधता की सच्चाई

सांकेतिक छाया
सरायकेला-खरसावां, 13 जुलाई : जिले में अवैध बालू खनन और परिवहन का खेल बदस्तूर जारी है। खासकर ईचागढ़ और तिरुलडीह थाना क्षेत्र से हर रोज रात के अंधेरे में बालू लदे हाईवा और ट्रैक्टर निकलते हैं, मानो यह एक तयशुदा व्यवस्था हो।
बालू कारोबारियों की बेचैनी तब साफ नज़र आती है जब इस अवैध धंधे पर किसी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी की नजर पड़ती है। इनकी स्थिति उस मछली की तरह हो जाती है जिसे पानी से बाहर निकाल दिया गया हो — बेकल, बेकाबू और छटपटाते हुए।
वैधता के दावे और सवालों की भीड़
बालू परिवहन में संलिप्त कारोबारी अक्सर यह तर्क देते हैं कि— हमारे पास चालान है, कागजात वैध हैं, यही हमारा रोजगार है।
लेकिन सवाल उठता है कि अगर सब कुछ वैध है, तो फिर रात के अंधेरे में ही बालू ढुलाई क्यों? क्या यह पूरी प्रक्रिया किसी कानूनी जांच की रोशनी से बचने की कोशिश नहीं है? यह सवाल सिर्फ जनमानस का नहीं, बल्कि प्रशासन और पर्यावरणीय संस्थाओं के लिए भी सोचनीय है।
NGT की गाइडलाइन और ज़मीनी सच्चाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि मानसून काल में किसी भी नदी से बालू का उठाव प्रतिबंधित रहेगा। इसके बावजूद ईचागढ़, तिरुलडीह, कुकड़ू और आसपास के इलाकों से रात के वक्त खुलेआम बालू की ढुलाई की जा रही है। इसका मतलब है कि या तो सरकारी तंत्र की मिलीभगत है या फिर उसकी पकड़ से परे यह पूरा नेटवर्क है।
हाल ही में नीमडीह थाना क्षेत्र में जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो द्वारा ओवरलोड और कथित अवैध बालू लदे वाहनों को रोकने की कार्रवाई ने इस गोरखधंधे पर एक बार फिर से बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ जनप्रतिनिधि अवैध कारोबार पर कार्रवाई के लिए सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की निष्क्रियता और मौन रवैये पर सवाल उठना लाजिमी है।
अवैध बालू परिवहन के काले कारनामे
रात में की जा रही बालू ढुलाई के पीछे सिर्फ एक कारण है—कानूनी कार्रवाई से बचना और अधिक से अधिक मुनाफा कमाना।
इन रूटों पर न तो पारदर्शी ट्रैकिंग सिस्टम लागू है, न ही कोई नियमित जांच चौकियाँ। परिणामस्वरूप भारी मात्रा में बालू चोरी-छुपे लोड कर बाजारों में भेजा जा रहा है, जिससे सरकार को राजस्व की बड़ी हानि हो रही है और पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान।
बालू खनन और परिवहन के इस धंधे में वैधता के नाम पर जो तर्क दिए जाते हैं, वे तब तक खोखले लगते हैं जब तक रात के अंधेरे में अवैध गतिविधियाँ बंद नहीं होतीं। यदि वाकई में सब कुछ वैध है, तो कारोबार को दिन के उजाले में क्यों नहीं किया जाता?
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस पूरे नेटवर्क की निगरानी के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करें, ट्रैकिंग अनिवार्य करें और रात में बिना जांच के कोई भी वाहन बालू लेकर न गुजरने पाए।



