नेतृत्व एक ओर, संगठन पर दाग दूसरी ओर – JLKM जिलाध्यक्ष पर वसूली के गंभीर आरोप, जनता में उबाल

Manbhum Updates
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सरायकेला, 30 अप्रैल : झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बना चुके Jairam Mahto जहां एक ओर युवाओं को जागरूक और संगठित करने की मुहिम में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही संगठन से जुड़ा एक मामला पार्टी की छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर रहा है।
JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में जयराम महतो लगातार राज्य की दिशा और दशा बदलने का दावा करते रहे हैं। उनके बेबाक और अलग अंदाज की चर्चा विरोधी खेमे में भी होती रही है। लेकिन अब जो मामला सामने आया है, उसने न केवल संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाया है, बल्कि जनता के बीच आक्रोश भी पैदा कर दिया है।
ताजा मामला सरायकेला-खरसावां जिले का है, जहां JLKM के जिलाध्यक्ष दीपक महतो पर एक पीड़ित महिला से एक लाख रुपये की कथित मांग करने का गंभीर आरोप लगा है।
कांड्रा निवासी संगीता दास, जिनके पुत्र की सर्पदंश से मृत्यु हो गई थी, उन्हें सरकार की ओर से चार लाख रुपये का मुआवजा मिला था। आरोप है कि इस मुआवजा राशि में से जिलाध्यक्ष दीपक महतो द्वारा एक लाख रुपये की मांग की जा रही है।
महिला ने लिखित शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि लगातार दबाव बनाया जा रहा है और यहां तक कहा गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो मुआवजा राशि वापस करवा दी जाएगी। इतना ही नहीं, दीपक महतो पर SBI का ब्लैंक चेक अपने पास रखने का आरोप भी लगाया गया है।
यह मामला सामने आते ही लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सवाल उठ रहा है कि जो संगठन आम जनता के हक और अधिकार की लड़ाई का दावा करता है, उसी के पदाधिकारी यदि पीड़ितों पर दबाव बनाने लगें तो फिर जनता किस पर भरोसा करे?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि एक ओर जयराम महतो अपनी साख और संघर्ष से संगठन को ऊंचाई पर ले जाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे आरोप उनके पूरे प्रयासों पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं।
पार्टी के भीतर भी अब असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। कई कार्यकर्ता और समर्थक जिलाध्यक्ष दीपक महतो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्कासन की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल यह देखना अहम होगा कि JLKM नेतृत्व इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है? क्या संगठन अपनी साख बचाने के लिए सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी अन्य आरोपों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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