मानगो मेयर चुनाव में कांटे की टक्कर: बहुदलीय समर्थन और आंतरिक समीकरणों के बीच मुकाबला रोचक

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मानगो मेयर चुनाव में कांटे की टक्कर: बहुदलीय समर्थन और आंतरिक समीकरणों के बीच मुकाबला रोचक

 

जमशेदपुर, 22 फरवरी : मानगो मेयर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। बदलते राजनीतिक समीकरणों और दलों के खुले समर्थन के बाद चुनावी तस्वीर अब पहले से अधिक स्पष्ट होती दिख रही है। जमीनी स्तर पर मिल रहे समर्थन और संगठित राजनीतिक ताकत के दम पर मेयर प्रत्याशी Sudha Gupta मजबूत स्थिति में नजर आ रही हैं।

मानगो नगर निगम के 36 वार्डों और लगभग 2,16,000 मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में यदि औसतन 60 प्रतिशत मतदान होता है, तो करीब 1,29,600 मत पड़ने का अनुमान है। ऐसे में 2–3 हजार वोट का अंतर चुनावी परिणाम को पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम चरण में संगठित समर्थन और बूथ स्तर की मजबूती निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सबसे अहम तथ्य यह है कि Indian National Congress ने आधिकारिक रूप से सुधा गुप्ता को समर्थन दिया है। इसके अलावा Rashtriya Janata Dal (राजद) तथा वाम दलों के साथ साथ कई मजदूर संगठनों, टेम्पो संघ, व्यापारी वर्ग भी खुलकर उनके पक्ष में समर्थन की घोषणा की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह महागठबंधन जैसा समर्थन मानगो की चुनावी बिसात पर बड़ा असर डाल सकता है।

सामाजिक समीकरणों की दृष्टि से भी सुधा गुप्ता को व्यापक समर्थन मिलता दिख रहा है। ब्राम्हर्षि समाज, मारवाड़ी समाज, ओबीसी वर्ग और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से उनके समर्थन का ऐलान किया है। इससे विभिन्न सामाजिक वर्गों में एक व्यापक समर्थन आधार तैयार होता नजर आ रहा है।

दूसरी ओर भाजपा समर्थित प्रत्याशी Sandhya Singh के समर्थन में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक Purnima Sahu तथा जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy पूरी ताकत झोंक रहे हैं। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा खेमे के भीतर भी समीकरण पूरी तरह एकजुट नहीं दिख रहे। भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी और मेयर प्रत्याशी Kumkum Shrivastav की सक्रियता तथा विकास सिंह की अलग रणनीति, संध्या सिंह के संभावित वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।

वहीं कांग्रेस से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरी Zeba Khan को पार्टी ने संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इसे कांग्रेस संगठन की ओर से स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अधिकृत समर्थन केवल सुधा गुप्ता को है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति काफी हद तक समाप्त हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव केवल सर्वेक्षणों के प्रतिशत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संगठित समर्थन, सामाजिक संतुलन और मतदान के दिन की रणनीति ही अंतिम परिणाम तय करती है। मौजूदा परिस्थितियों में बहुदलीय समर्थन, सामाजिक आधार और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को देखते हुए मानगो मेयर पद की दौड़ में सुधा गुप्ता की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि अंतिम फैसला मतपेटी ही करेगी, लेकिन वर्तमान राजनीतिक संकेत यह दर्शा रहे हैं कि मानगो की सियासत में इस बार परिणाम कई समीकरणों को नया आकार दे सकता है।

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