भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा का प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
जमशेदपुर, 22 जुलाई : भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), पूर्वी सिंहभूम के बैनर तले बुधवार को किसानों और संगठन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित समझौते पर पुनर्विचार की मांग की गई।
ज्ञापन में संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों के प्रतिकूल है। संगठन का आरोप है कि समझौते के तहत अमेरिका से आयात होने वाले औद्योगिक एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क में भारी कटौती अथवा उसे समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। इससे अमेरिकी गेहूं, चावल, मक्का, दालें, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, फल, सूखे मेवे, कपास और पोल्ट्री उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिसका सीधा असर देश के किसानों की आय पर पड़ेगा।
मोर्चा का कहना है कि अमेरिका और भारत की कृषि व्यवस्था में बुनियादी अंतर है। अमेरिका में केवल करीब दो प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और वहां किसानों को सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जाती है। इसके विपरीत भारत में अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जो पहले से ही बढ़ती लागत, कर्ज और फसलों के उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि खाद, बीज, डीजल और कीटनाशकों की लगातार बढ़ती कीमतों से खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे समय में विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलना किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा।
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति से मांग की कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पुनर्विचार किया जाए तथा किसानों और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए इसे वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की मांगों की अनदेखी की, तो देशभर में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।