MMDR बिल पर भाजपा-झामुमो आमने-सामने, आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई सियासत
सरायकेला, 30 सितंबर : खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 यानी MMDR संशोधन बिल को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरायकेला-खरसावां में भी इस मुद्दे पर भाजपा और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा नेता डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी और झामुमो के केंद्रीय सदस्य मनोज यादव ने अपने-अपने पक्ष रखते हुए एक-दूसरे के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है।
भाजपा की ओर से डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी ने MMDR संशोधन को लेकर झामुमो पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपनी सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए बिल को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। उन्होंने बिल के प्रावधानों को झारखंड के हित में बताते हुए कहा कि इससे खनन क्षेत्र में स्थिरता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
वहीं, झामुमो की ओर से मनोज यादव ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए MMDR संशोधन को लेकर राज्य के अधिकार और खनिज संसाधनों से होने वाले राजस्व के सवाल उठाए हैं। झामुमो समेत राज्य सरकार की ओर से बिल के कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी अगस्त में इस मुद्दे पर केंद्र के रुख के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
दरअसल, संसद ने MMDR संशोधन विधेयक को अगस्त 2026 में पारित किया था। विधेयक में राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर कुछ कर, सेस या अन्य लेवी लगाने पर केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के तहत प्रतिबंध का प्रावधान है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि राज्यों के कुल खनन राजस्व में उनकी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा यथावत रहेगा।
इस मुद्दे पर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच राजस्व तथा राज्यों के अधिकार को लेकर मतभेद सामने आए हैं। झारखंड सरकार ने संशोधन के खिलाफ आगे कानूनी और राजनीतिक कदम उठाने की बात कही है।
फिलहाल MMDR बिल को लेकर भाजपा और झामुमो के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। दोनों दल अपने-अपने तर्कों के जरिए इस कानून के प्रावधानों और झारखंड पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर जनता के बीच अपनी बात रख रहे हैं।



