मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु, लगे माता के जयकारे

चांडिल, 01 अक्टूबर : शारदीय नवरात्रक के नौवें और अंतिम दिन महानवमी के अवसर पर बुधवार को देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की गई। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा नौ दिनों की साधना की पूर्णता का प्रतीक है। मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के बाद मंदिरों और पूजा पंडालों के अलावा देवी के भक्तों ने अपने-अपने घरों में हवन-यज्ञ का अनुष्ठान कर नवरात्रि का पूर्णाहूति दिया। कई स्थानों में कन्या पूजन किया गया। नौक कन्याओं को देवी के नौ रूपों की प्रतीक मानकर उनकी पूजा-अर्चना की गई और उनका श्रींगार कर उन्हें उपहार दिए गए।
चौका में उमड़ी भीड़
महानवमी पर मां सिद्धीदात्री की पूजा-अर्चना के लिए चौका में सार्वजनिक श्रीश्री नवदुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजित पूजनोत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बुधवार को सुबह देवी के नौवें रूप मां सिद्धिदात्री के पूजन के लिए कलश यात्रा निकाली गई। मंदिर में कलश स्थापना के बाद देवी का पूजन प्रारंभ हुआ। इसके साथ ही मंदिर में आदि शक्ति देवी दुर्गा की नवमी विहित पूजा किया गया। देवी के दर्शन-पूजन के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर में नवरात्री का पूर्णाहूति देने के लिए हवन यज्ञ किया गया।
भक्तों को सिद्धियां देती है मां
महानवमी के दिन मां दुर्गा की नौवीं शक्ति मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां और ज्ञान प्रदान करती हैं। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने भी सिद्धियां प्राप्त करने के लिए मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की थी। उनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया था, जिससे वह ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए।



