जादूगोड़ा में ‘घर से कारोबार’ की मिसाल : आदिवासी महिलाओं ने बदली तकदीर, यूसिल ने किया सम्मानित

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जादूगोड़ा, 26 मार्च : अब आत्मनिर्भरता की कहानी सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांव-कस्बों की महिलाएं भी ‘घर से कारोबार’ की नई मिसाल पेश कर रही हैं। ऐसा ही मिसाल जादूगोड़ा स्थित Uranium Corporation of India Limited (यूसिल) से सटे सात गांवों की आठ महिला समूहों की सैकड़ों महिलाएं घर पर ही विभिन्न उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

इन्हीं महिलाओं के हौसले और मेहनत को सलाम करते हुए गुरुवार को भाटीन पंचायत भवन में यूसिल की ओर से सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व सीएसआर अधिकारी तपोधिर भट्टाचार्य एवं मनोज हेंब्रम ने किया।
समारोह का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद महिला समूहों को सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि शिल्पा राव (अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ. कंचम आनंद राव की पत्नी) और विशिष्ट अतिथि मधुलिका दास (वित्त निदेशक विक्रम केसरी दास की पत्नी) ने महिलाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

मौके पर शिल्पा राव ने कहा कि जादूगोड़ा की आदिवासी महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ व्यवसाय भी सफलतापूर्वक संभाल रही हैं, जो आने वाले समय में क्षेत्र के विकास की मजबूत आधारशिला बनेगा। वहीं मधुलिका दास ने कहा कि महिलाएं कौशल सीखकर आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपनी आय बढ़ा रही हैं, जो सशक्त समाज की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

कार्यक्रम के दौरान आठों महिला समूहों ने अपने-अपने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई, जिसमें हस्तनिर्मित सामग्री, घरेलू उपयोग के उत्पाद और स्थानीय कला की झलक देखने को मिली। यह प्रदर्शनी न केवल महिलाओं की मेहनत को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता के बढ़ते कदमों का भी प्रतीक बनी।

समारोह को सफल बनाने में यूसिल के अधिकारियों एवं महिला क्लब की सदस्यों की अहम भूमिका रही। जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और तूरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

यह पहल केवल सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को ‘घरेलू कामकाज’ से आगे बढ़ाकर ‘सूक्ष्म उद्यमी’ बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। जादूगोड़ा की ये महिलाएं अब स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही हैं, जो क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को जमीन पर उतारने का सशक्त उदाहरण है।

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