घाटशिला में ट्रेन से कटकर तीन हाथियों की मौत, वन विभाग की लापरवाही पर उठे सवाल

घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम संवाददाता,18 जुलाई : पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र से एक दर्दनाक और चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां देर रात ट्रेन की चपेट में आने से तीन हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृत हाथियों में एक वयस्क और दो शावक शामिल हैं। यह हादसा सरडीहा–झाड़ग्राम सेक्शन के किलोमीटर 143 के पास, पोल संख्या 11/13 के बीच रेलवे ट्रैक पार करते समय हुआ। घटना का समय रात करीब 12:50 बजे बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे की सूचना मिलते ही पूर्व रेलवे के खड़गपुर मंडल ने तत्परता दिखाते हुए रात 1 बजे से अप और डाउन दोनों लाइनों पर रेल परिचालन रोक दिया। घटनास्थल पर रेलवे की टीम रात में ही रवाना हो गई और मृत हाथियों के शवों को सुबह तक ट्रैक से हटा दिया गया। अप लाइन को सुबह 6:15 बजे और डाउन लाइन को 7:30 बजे पुनः चालू कर दिया गया। हालांकि, अब तक खड़गपुर मंडल की ओर से इस हादसे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने एक बार फिर वन विभाग और रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्ग (Elephant Corridor) के रूप में चिन्हित है। इसके बावजूद न तो वन विभाग ने रेलवे को समय पर अलर्ट किया, और न ही रेलवे ने इस संवेदनशील क्षेत्र में गति नियंत्रण या निगरानी के लिए कोई विशेष उपाय किया।

वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीरता पर प्रश्नचिह्न
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए रेलवे ट्रैक पर सौर ऊर्जा आधारित चेतावनी प्रणाली, गति सीमा, गश्ती दल एवं वन विभाग की सतर्कता अनिवार्य है। परंतु इन सभी व्यवस्थाओं का धरातल पर अभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों एवं पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि वन विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है।
मांग उठी, जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई
हाथियों की लगातार हो रही मौतें न सिर्फ जैव विविधता के लिए खतरा हैं, बल्कि यह देश के वन्यजीव कानूनों की खुलेआम अवहेलना भी है। पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घाटशिला की यह घटना वन विभाग और रेलवे के बीच समन्वय की विफलता का प्रत्यक्ष उदाहरण है। अगर प्रशासन अब भी नहीं चेता, तो आने वाले समय में ऐसे हादसे और अधिक बढ़ सकते हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के सारे प्रयास व्यर्थ हो जाएंगे।



