टाटा लीज नवीनीकरण में रैयतों को न्याय नहीं मिलने का आरोप, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

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टाटा लीज नवीनीकरण में रैयतों को न्याय नहीं मिलने का आरोप, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

जमशेदपुर, 17 दिसंबर : टाटा कंपनी के लीज नवीनीकरण से जुड़े मामलों में रैयतों, मूल निवासियों एवं विस्थापितों को अब तक न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए झारखंड मूलवासी अधिकार मंच एवं टाटा विस्थापित आदिवासी मंच की ओर से हरमोहन महतो और दीपक रंजीत ने संयुक्त रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस संबंध में जारी बयान में कहा गया कि रैयतों एवं विस्थापितों के अधिकारों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

बताया गया कि 21 फरवरी 2025 को इस विषय को लेकर राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार को विधिवत ज्ञापन सौंपा गया था। इसके आलोक में विभाग द्वारा 11 दिसंबर 2025 को उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को पत्र जारी कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

मंच का आरोप है कि वर्ष 2005 के लीज नवीनीकरण के दौरान भी रैयतों के अधिकारों की अनदेखी की गई थी, जिसका दुष्परिणाम आज तक सामने आ रहा है। उन्होंने मांग की कि 2005 के लीज नवीनीकरण की पुनः समीक्षा कर रैयतों एवं विस्थापितों के साथ हुए अन्याय को सुधारा जाए।

साथ ही आरोप लगाया गया कि टाटा कंपनी द्वारा कई स्थानों पर बिना लीज एवं बिना विधिवत अधिग्रहण रैयती भूमि पर कब्जा किया गया है। ऐसी सभी जमीनों की पहचान कर उन्हें मूल रैयतों को वापस करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त न्यायालय में लंबित मामलों से जुड़ी जमीनों को लीज अथवा सब-लीज पर दिए जाने को न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया गया।

मंच ने यह भी मांग की कि शहर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने तालाब, जलस्रोत एवं सामुदायिक संसाधन ग्रामसभा को सौंपे जाएँ तथा पेसा कानून एवं CNT/SPT अधिनियम के तहत ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी भूमि संबंधी निर्णय को अवैधानिक माना जाए।

अंत में मंच ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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