जन सरोकार से जुड़े मामलों के प्रखर वक्ता और अग्रणी पंक्ति के सामाजिक कार्यकर्ता थे कपूर बागी
चांडिल, 06 मई : सरायकेला – खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल प्रखंड के चाकुलिया निवासी प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता कपूर टुडू उर्फ कपूर बागी की प्रथम पुण्यतिथि पर बुधवार को उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कपूर बागी झारखंड आंदोलन के एक प्रमुख योद्धा, सामाजिक कार्यकर्ता और संघर्ष वाहिनी के अभिन्न अंग थे। सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रतीक रहे कपूर बागी का जीवन अत्यंत साधारण और प्रेरणादायी रहा। छात्र जीवन से ही कपूर बागी अन्याय, शोषण और भेदभाव के खिलाफ खड़े हो गए थे। झारखंड के आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उन्होंने अपनी जवानी समर्पित कर दी। सुवर्णरेखा परियोजना के विस्थापन आंदोलन में वे अग्रिम पंक्ति में रहे। कोल्हान क्षेत्र में कही भी जन आंदोलन हो वहीं कपूर बागी पहले पंक्ति में खड़े रहते थे।
न रिश्तों का लाभ, न पद का लोभ
कपूर बागी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन का भागना और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फुफेरे भाई थे। फिर भी, उन्होंने कभी इन रिश्तों का सार्वजनिक जीवन में लाभ नहीं उठाया। जब लोग झंडा ढोकर मंत्री बन जाते हैं, तब बागी जी पुआल की झोपड़ी में रहना पसंद करते थे। उन्होंने कभी किसी के आगे झुकना या अपने लिए कुछ मांगना स्वीकार नहीं किया। उनका जीवन सत्य, आत्मसम्मान और संघर्ष की मिसाल है। करीबी राजनीतिक रिश्तों के बावजूद उन्होंने कभी राजनीतिक लाभ नहीं उठाया। वे छात्र युवा संघर्ष वाहिनी, दलमा मुक्ति वाहिनी, झारखंड मुक्ति वाहिनी, विस्थापित मुक्ति वाहिनी और जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी जैसे संगठनों में सक्रिय रहे। बीमारी के बावजूद भी वे अंतिम समय तक जन सरोकारों से जुड़े रहे।
कपूर बागी की सादगी प्रेरणास्रोत
कपूर बागी जन सरोकार से जुड़े विषयों के प्रखर वक्ता और सामाजिक आंदोलनों के अग्रणी चेहरा थे। वे विशेष रूप से ग्रामीण समस्याओं, आदिवासी अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहते थे। उनकी स्पष्टवादिता, निष्पक्ष सोच और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई। वे हर वर्ग के लोगों के लिए सहज उपलब्ध रहते थे और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहते थे। कई बार तो वे सरकार के खिलाफ भी आंदोलन किया। उनके निधन से क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है और एक ऐसा शून्य उत्पन्न हो गया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती। कपूर बागी की सादगी, समर्पण और जनसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।