ध्वस्त पुल बना मौत का जाल, NHAI की लापरवाही से फिर दो जिंदगी खतरे में

टाटा–रांची नेशनल हाइवे पर हादसों का सिलसिला जारी, डेढ़ साल से बंद पुल पर अब तक दर्जनों मौतें
चांडिल, 27 जनवरी : टाटा–रांची नेशनल हाइवे (टोल रोड) पर चिलगु स्थित ध्वस्त पुल एक बार फिर NHAI की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया। सोमवार को इसी जर्जर और अधूरे पड़े पुल के कारण एक और सड़क हादसा हुआ, जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) कब तक लोगों की जान से खिलवाड़ करती रहेगी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले के धालभूमगढ़ निवासी सामंत प्रमाणिक और पश्चिम बंगाल के मधुपुर निवासी सीताराम मन्ना दोपहिया वाहन से लौट रहे थे। चिलगु पुल के समीप अचानक रास्ता स्पष्ट न होने और अव्यवस्था के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया। दोनों पुल में गिरने से तो बाल-बाल बच गए, लेकिन पुल से ठीक पहले मिट्टी के ढेर पर जा गिरे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
बताया गया कि दोनों चांडिल के टुईलुंग में रिश्तेदार के यहां श्राद्ध कर्म में शामिल होने आए थे। हारुडीह (चांडिल) मेला देखने के बाद लौटते समय वे इस हादसे का शिकार हो गए। सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को महतो पॉली क्लिनिक में प्राथमिक उपचार दिलाया, जिसके बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए नेशनल हाइवे एम्बुलेंस से एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर भेजा गया। घटना की जानकारी मिलते ही चांडिल पुलिस भी मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
गौरतलब है कि चिलगु में स्थित यह पुल डेढ़ वर्ष से अधिक समय से बंद है। स्थानीय दबाव के बाद NHAI ने नया पुल बनाने का आश्वासन देते हुए पुराने जर्जर पुल को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, लेकिन उसके बाद से निर्माण कार्य को लेकर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई। पुल को ध्वस्त किए करीब दो महीने बीत चुके हैं, बावजूद इसके संवेदक द्वारा नया पुल बनाने का काम अब तक शुरू तक नहीं किया गया।
स्थिति यह है कि चिलगु मोड़ से शहरबेड़ा मोड़ तक मार्ग को वन-वे कर दिया गया है, नतीजा यह है कि यह मार्ग अब दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अक्टूबर 2024 से मार्ग बंद और वन-वे होने के बाद अब तक अनगिनत हादसे हो चुके हैं। सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि इस लापरवाही भरे इंतजाम के कारण करीब 46 लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद NHAI और संबंधित एजेंसियां सिर्फ आश्वासन देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ती नजर आ रही हैं।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में और भी कई निर्दोष लोग इस मौत के जाल का शिकार होंगे।
हालांकि, NHAI ने दुर्घटना से बचाव और सुरक्षा हेतु चिलगु मोड़ पर बेरीकेडिंग किया गया है और गति रोधक निर्माण कराया गया। इसके बावजूद दो पहिया वाहन आए दिन बंद पुल के समीप दुर्घटना के शिकार हो ही जाते हैं। वहीं, करीब डेढ़ किलोमीटर तक जिस मार्ग को वन वे किया गया है, उसमें भी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।



