विश्व ब्रेल दिवस पर दुबराजपुर व खूंटी गांव में जागरूकता शिविर आयोजित

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विश्व ब्रेल दिवस पर दुबराजपुर व खूंटी गांव में जागरूकता शिविर आयोजित

चांडिल, 04 जनवरी : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), सरायकेला-खरसावां के निर्देशानुसार रविवार 4 जनवरी 2026 को चांडिल प्रखंड अंतर्गत दुबराजपुर एवं खूंटी गांव में संयुक्त रूप से विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य दिव्यांगजनों, विशेषकर दृष्टिबाधित एवं श्रवण-बाधित बच्चों और उनके परिजनों को कानूनी अधिकारों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देना था।

कार्यक्रम के दौरान दुबराजपुर गांव में दो ऐसे बच्चे पाए गए, जो जन्मजात बोलने और सुनने में अक्षम हैं। इस पर पैरा लीगल वालंटियरों द्वारा उनके परिजनों से आवेदन लिया गया और उचित चिकित्सा हेतु मार्गदर्शन किया गया। परिजनों को बताया गया कि प्रत्येक माह की 28 तारीख को सदर अस्पताल, सरायकेला में विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन होता है, जहां इन बच्चों का निशुल्क इलाज किया जाएगा।

शिविर में उपस्थित ग्रामीणों को डालसा के टोल फ्री नंबर 15100 तथा बच्चों से संबंधित सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1098 की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सरकारी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं डालसा द्वारा उपलब्ध निशुल्क विधिक सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया गया।

विश्व ब्रेल दिवस के अवसर पर ब्रेल लिपि से जुड़े प्रमुख बिंदुओं पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि नेत्रहीन व्यक्ति उंगलियों से उभरे बिंदुओं को स्पर्श कर पढ़ते और लिखते हैं। ब्रेल में प्रत्येक अक्षर या प्रतीक छह बिंदुओं के विशेष पैटर्न से दर्शाया जाता है। यह स्वयं कोई भाषा नहीं, बल्कि विभिन्न भाषाओं को लिखने का एक कोड है। ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए साक्षरता का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसका उपयोग शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान एवं संगीत में भी किया जाता है। ब्रेल लिपि का आविष्कार लुई ब्रेल ने किया था, जो स्वयं दृष्टिबाधित थे।

इस जागरूकता कार्यक्रम में पैरा लीगल वालंटियर अरुण कुमार महतो, विष्णु महतो, वंदना महतो सहित दुबराजपुर एवं खूंटी गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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