बिरसा सेना एवं कोका कामार करमाली संघर्ष समिति ने श्रद्धा के साथ मनाया कोका कामार का 130वां शहादत दिवस

जमशेदपुर, 8 जनवरी : बिरसा सेना एवं कोका कामार करमाली संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को आदिवासी-मुलवासी समाज के अमर वीर शहीद कोका कामार का 130वां शहादत दिवस मनाया गया। जमशेदपुर के बारिडीह स्थित कोका कामार चौक पर श्रद्धा, सम्मान और सामाजिक संकल्प के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत शहीद कोका कामार की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर एवं दो मिनट का मौन रखकर की गई। इस अवसर पर आदिवासी-मुलवासी समाज के बड़ी संख्या में लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा, महिला प्रतिनिधि एवं विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शहीद कोका कामार धरती आबा बिरसा मुंडा के प्रमुख सेनापतियों एवं अत्यंत विश्वस्त सहयोगियों में से एक थे।
उलगुलान आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन, जमींदारी प्रथा और बाहरी शोषण के विरुद्ध निर्णायक भूमिका निभाई। उनके साहस और नेतृत्व से अंग्रेजी हुकूमत इतनी भयभीत थी कि उन्हें हाथ-पैर में बेड़ियां डालकर जेल में रखा गया, ताकि वे कैद में रहते हुए भी किसी विद्रोह या जनआंदोलन का केंद्र न बन सकें। यह तथ्य उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व और प्रभाव को दर्शाता है।
सभा में आह्वान किया गया कि शहादत दिवस केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने, सामाजिक एकता को मजबूत करने तथा आदिवासी-मुलवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संगठित प्रयास किए जाएं।
इस अवसर पर बिरसा सेना के संस्थापक प्रमुख बलराम कर्मकार सहित केंद्रीय सदस्य राजू लोहरा, बिसु लोहरा, अरमान बावरी, गोविंद कर्मकार, सुनील सोरेन, डेनियाल उरांव, लाल मुंडा, विकास पात्रो, विष्णु नाग, दीपक मुर्मू, दीपक रंजीत, कृष्णा लोहार, उमाकांत ओझा, दीपक लकड़ा समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग मौजूद थे।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।



