
चांडिल, 22 मार्च : आदिवासी समाज की समृद्ध परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने के उद्देश्य से चांडिल गोलचक्कर क्षेत्र में सरहुल (बाहा) पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) समिति, आदिवासी समन्वय समिति तथा पातकोम दिशोम जाहेरगाढ़ समिति के संयुक्त तत्वावधान में सेंदरा (पारंपरिक शिकार उत्सव) का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के तहत रविवार को चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेर में प्रकृति पर्व सरहुल का विधिवत एवं शांतिपूर्ण समापन हुआ। आयोजन पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की सहभागिता रही।
पर्व के दूसरे दिन पारंपरिक सेंदरा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो आदिवासी समाज की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है। इस दौरान प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से शिकार की परंपरा का प्रतीकात्मक निर्वहन किया। इसे बाहा या सरहुल सेंदरा के रूप में भी जाना जाता है।
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर अपनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। मांदर, नगाड़ा और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर हुए सामूहिक नृत्य और गीतों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। चारों ओर उत्साह, एकता और सांस्कृतिक गौरव का दृश्य देखने को मिला।
इस अवसर पर आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजन न केवल पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का भी कार्य करते हैं।



