करम पूजा संपन्न होने के बाद ईचागढ़ पुलिस ने की शांति समिति की बैठक, ग्रामीणों ने उठाया औचित्य पर सवाल

ईचागढ़, 03 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ पुलिस का कारनामा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में सड़क हादसे में वीवीआई सुरक्षा में तैनात वर्दीधारी नकली चौकीदार की मौत से ईचागढ़ पुलिस चर्चाओं में है। कथित चौकीदार मृतक नारायण गोराई के मामले में अबतक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अब और एक नया मामला सामने है, जिसके कारण ईचागढ़ पुलिस की कार्यशैली और विधि व्यवस्था को लेकर उसकी गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दअरसल ईचागढ़ थाना परिसर में बुधवार की शाम शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में करम पूजा और आगामी 5 सितंबर को होने वाले ईद-मिलाद-उन-नबी को लेकर चर्चा हुई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ कि जब आज ही करम पूजा संपन्न हो गया, तो उसके बाद करम पर्व के नाम पर बैठक कराने का क्या औचित्य था?
आम तौर पर शांति समिति की बैठक किसी भी पर्व या त्योहार से पहले आयोजित की जाती है, ताकि विधि-व्यवस्था, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर समुचित तैयारी की जा सके। मगर ईचागढ़ पुलिस ने करम पूजा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर यह बैठक उसी दिन पूजा खत्म होने के बाद बुलाकर अपनी गंभीरता पर सवाल खड़ा कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह बैठक औपचारिकता निभाने के लिए की गई, न कि वास्तव में शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए।
बैठक के दौरान समिति सदस्यों और ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यप्रणाली की जमकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बाइक चेकिंग के नाम पर पुलिस आम लोगों को बेवजह परेशान करती है। ग्रामीणों ने मांग की कि ऑन-द-स्पॉट चालान की व्यवस्था हो, ताकि लोगों को शाम के समय अनावश्यक रूप से दूर-दराज नहीं भटकना पड़े।

थाना प्रभारी बिक्रम आदित्य पांडे ने बैठक में मौजूद लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में हेलमेट पहनने और कागजात रखने के लिए जागरूकता फैलाएँ। मगर ग्रामीणों का कहना था कि पुलिस यदि वाकई गंभीर होती, तो करम पूजा से पहले ही बैठक कर तैयारी सुनिश्चित करती, न कि बाद में खानापूर्ति करती। इस अवसर पर ईचागढ़ प्रखंड के प्रमुख गुरूपद मार्डी, आमड़ा व वनडीह अंजुमन कमेटी के सदस्य, कई पंचायत प्रतिनिधि समेत कई गणमान्य उपस्थित थे।



