दलमा की रक्षा को लेकर 25 फरवरी को महा सम्मेलन, उग्र आंदोलन का ऐलान

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दलमा की रक्षा को लेकर 25 फरवरी को महा सम्मेलन, उग्र आंदोलन का ऐलान

जल-जंगल-जमीन बचाने सड़कों पर उतरेगा आदिवासी समाज, ग्राम सभा अधिकारों की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर

चांडिल, 10 फरवरी : दलमा क्षेत्र में संविधान, आदिवासी अधिकार और ग्राम स्वशासन पर हो रहे कथित हमलों के विरोध में अब व्यापक जन आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच, कोल्हान के आह्वान पर 25 फरवरी को माकुलाकोचा फुटबॉल मैदान में एक महा जन सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसकी जानकारी मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी गई। प्रेस वार्ता में आंदोलन को उग्र और निर्णायक रूप देने का खुला ऐलान किया गया।

प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दलमा क्षेत्र में पांचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 244(1), पेसा अधिनियम 1996, वन अधिकार अधिनियम 2006 और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की लगातार अनदेखी की जा रही है। ग्राम सभा की सहमति के बिना निर्णय थोपे जा रहे हैं, जिससे आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ग्राम सभा और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान नहीं किया गया तो यह संघर्ष केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा। अब चुप रहने का समय समाप्त हो चुका है और दलमा की धरती अपने अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई खुद लड़ेगी।

प्रेस वार्ता को सुकलाल पहाड़िया, महावीर हांसदा, देवनाथ सिंह मुंडा, राधेश्याम भूमिज, बुद्धेश्वर हेम्ब्रम और पारंपरिक लाया भूषण पहाड़िया ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि शोषण और दमन नहीं रुका तो संघर्ष और तेज किया जाएगा। आयोजकों ने दलमा क्षेत्र के हर गांव, हर युवा और प्रत्येक ग्राम सभा से अपील की है कि 25 फरवरी को सुबह 11 बजे माकुलाकोचा फुटबॉल मैदान पहुंचकर अपनी एकजुटता दिखाएं और संविधान व ग्राम स्वशासन की रक्षा के इस आंदोलन को ऐतिहासिक बनाएं।

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