सड़क, बिजली, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधा से वंचित टोला; बरसाती नाले पर बांस-लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर बचाए आवागमन के रास्ते
चांडिल, 08 जून : एक ओर सरकार गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के दावे कर रही है, वहीं सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत उरमाल पंचायत का हाथीकोचा टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को अपने ही गांव का संपर्क बनाए रखने के लिए हर वर्ष खुद श्रमदान कर पुल बनाना पड़ता है।
रविवार को हाथीकोचा के ग्रामीणों ने मुख्य सड़क पर स्थित बरसाती नाले के ऊपर बांस और लकड़ी से अस्थायी पुल का निर्माण किया। इसके बाद सामूहिक श्रमदान कर पुल पर मिट्टी भरकर आवागमन योग्य रास्ता तैयार किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वे स्वयं यह कार्य नहीं करें तो बरसात के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह कट सकता है।
इस टोला की आबादी लगभग 250 है। यहां तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसाती नाले पर पुल नहीं होने के कारण हर वर्ष लोगों को अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है, जो बारिश में बह जाने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथीकोचा में आज तक बिजली, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जबकि बीमार पड़ने पर मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। रोजगार के अवसर नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के कई दशक बीत जाने और राज्य में विभिन्न सरकारों के गठन के बावजूद गांव विकास की रोशनी से अछूता है। उनका कहना है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गांव पहुंचते हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होती।
उरमाल पंचायत के मुखिया भीम सिंह मुंडा ने बताया कि हाथीकोचा में मनरेगा योजना के तहत डोभा निर्माण और समतलीकरण जैसे कुछ कार्य हुए हैं, लेकिन इसके अलावा विकास की कोई बड़ी योजना नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि एक बार पेयजल के लिए चापाकल स्वीकृत हुआ था, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण सामग्री गांव तक नहीं पहुंच सकी। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच हाथीकोचा आज भी सरकारी योजनाओं की पहुंच का इंतजार कर रहा है।