चांडिल में भुमिज मुड़ा समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
चांडिल, 08 जून: चांडिल प्रखंड क्षेत्र में आदिवासी भुमिज मुड़ा समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बैठक सह प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 40 गांवों के हातु सरदार, मुड़ा, नाया एवं डाकुआ को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था गांवों की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहचान की आधारशिला है। इसे मजबूत बनाए रखने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक व्यवस्थाएं न केवल समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करती हैं, बल्कि सामुदायिक एकता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देती हैं।
कार्यक्रम के दौरान पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) नियमावली की भी विस्तृत जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और स्थानीय विकास से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं। इन अधिकारों के प्रति जागरूक होकर उनका प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक में उपस्थित हातु सरदारों, मुड़ाओं, नायाओं और डाकुओं ने समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने तथा आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर रविंद्र सरदार, जयनाथ सिंह भुमिज, राधेश्याम भुमिज, जय सिंह, शुषेन सिंह, संजय सरदार, हरिश भुमिज, देवनाथ सिंह, मंटू सिंह सरदार, भदरु सिंह मुंडा, श्यामापद सिंह सरदार, नितु सिंह सरदार, दुर्गाचरण सिंह सरदार, मंगल सिंह सहित विभिन्न गांवों के हातु सरदार, मुड़ा, नाया, डाकुआ एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने का आह्वान किया गया।