ईचागढ़ में हाथियों का कहर : मासूम की चीखों में थम गई सांस, मां ने बचाने की कोशिश में गंवाई जान

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ईचागढ़, 25 अप्रैल : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ थाना क्षेत्र के हाड़ात गांव से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। बीती रात जंगली हाथियों के झुंड ने ऐसा तांडव मचाया कि एक मां और उसकी 13 वर्षीय बेटी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए।

बताया जाता है कि रात करीब दो बजे चार से पांच हाथियों का झुंड पहले बामुनडीह गांव में उत्पात मचाने के बाद हाड़ात गांव पहुंचा। गांव में गहरी नींद में सोए लोग इस बात से अनजान थे कि मौत उनके दरवाजे पर दस्तक दे चुकी है।

हाथियों का झुंड सबसे पहले उस मिट्टी के घर पर टूट पड़ा, जहां मोहनलाल महतो और उनकी पत्नी सांतुला देवी सो रहे थे। देखते ही देखते हाथियों के प्रहार से पूरा घर भरभराकर ढह गया और दोनों बुजुर्ग मलबे में दब गए। दर्द से कराहते उनकी चीखें रात के सन्नाटे को चीरने लगीं।

इधर, अपने माता-पिता की आवाज सुनकर पास ही दूसरे घर में सो रहे कमलचंद महतो, उनकी पत्नी चायना देवी और 13 वर्षीय बेटी अमिता बाला बाहर की ओर दौड़े। लेकिन उन्हें क्या पता था कि आंगन में मौत उनका इंतजार कर रही है।

जैसे ही वे बाहर निकले, एक हाथी ने अमिता बाला को अपनी सूंड में जकड़ लिया और उसे पटक-पटक कर मारना शुरू कर दिया। अपनी फूल जैसी बच्ची को इस हालत में देखकर मां चायना देवी खुद को रोक नहीं सकीं। वह अपनी बेटी को बचाने के लिए हाथियों के बीच कूद पड़ीं। लेकिन मातृत्व की यह आखिरी कोशिश उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गई, एक हाथी ने उन्हें पैरों तले कुचल दिया।

कुछ ही पलों में मां-बेटी की चीखें हमेशा के लिए खामोश हो गईं। गांव में गूंजती उनकी दर्दनाक चीखें हर किसी के दिल को झकझोर गईं।

इस भयावह मंजर के बीच कमलचंद महतो ने सूझबूझ दिखाते हुए पहले खुद को छिपाया, फिर किसी तरह अपने नवजात बेटे अमित महतो को उठाकर अंधेरे में गांव से दूर भाग निकले और उसकी जान बचा ली।

एक तरफ मलबे में दबे बुजुर्ग मदद के लिए पुकार रहे थे, तो दूसरी ओर मां-बेटी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थीं। आखिरकार ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाई, इकट्ठा होकर हाथियों को गांव से खदेड़ा और फिर घायलों को बाहर निकाला।
घटना की सूचना मिलते ही आजसू नेता हरेलाल महतो ने तत्परता दिखाते हुए “जन सेवा ही लक्ष्य” एम्बुलेंस को मौके पर भेजा। घायल बुजुर्गों को पहले पातकुम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए MGM, जमशेदपुर रेफर कर दिया गया।

इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे ईचागढ़ क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों में आक्रोश भी है और डर भी, क्योंकि जंगल से सटे गांवों में ऐसे हादसे अब आम होते जा रहे हैं।

मौके पर ईचागढ़ थाना प्रभारी बजरंग महतो पुलिस बल के साथ पहुंचे और जांच शुरू की। वन विभाग की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजे के रूप में नकद सहायता प्रदान की है।

लेकिन सवाल अब भी बाकी है कि आखिर कब तक गांवों में यूं ही हाथियों का आतंक जारी रहेगा? और कब तक मासूम जिंदगियां इस तरह बेबस होकर दम तोड़ती रहेंगी?

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