अवैध बालू कारोबार पर जिला परिषद उपाध्यक्ष का बड़ा खुलासा, कहा – “सच की आवाज़ को झूठे मुकदमे से दबाने की कोशिश”

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अवैध बालू कारोबार पर जिला परिषद उपाध्यक्ष का बड़ा खुलासा, कहा – “सच की आवाज़ को झूठे मुकदमे से दबाने की कोशिश”

मधुश्री महतो बोलीं – “सच्चाई उठाई तो मुझे ही झूठे केस में फंसाने की साजिश की जा रही”

सरायकेला, 18 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले में रात के अंधेरे में बालू लदे हाईवा ट्रकों की आवाजाही और प्रशासनिक चुप्पी को लेकर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने इस प्रकरण में प्रशासन की निष्क्रियता और सुनियोजित प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने के प्रयास में उनके सहयोगियों को झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश की जा रही है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगी।

रात में अवैध बालू का खेल, सूचना देने के बावजूद देर से पहुँचा प्रशासन

मधुश्री महतो ने बताया कि 12 जुलाई 2025 की रात लगभग 12:35 बजे कुकड़ू प्रखंड के ग्रामीणों से सूचना मिली कि नीमडीह थाना क्षेत्र के सिरूम चौक पर अवैध बालू लदे दो हाईवा ट्रक खड़े हैं। उन्होंने तत्काल संबंधित अंचलाधिकारी को कॉल किया, लेकिन रात 1:25 बजे भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। अंततः लगभग सुबह 5:30 बजे खनन पदाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे।

 

प्रशासन ने मौके पर दो हाईवा गाड़ी जब्त की। जिसका वाहन संख्या JH01CE4317 (Tata Hyva) तथा JH01CW4330 (Tata Hyva) है।

मधुश्री महतो ने कहा कि दोनों गाड़ियों में 01-01 ड्राइवर मौजूद थे। पूछताछ में एक का नाम कैलाश गोप (पिता – जगननाथ गोप) और दूसरे का नाम बीरबल गोप (पिता – जननाथ गोप) बताया गया, जो पश्चिम बंगाल के बागमुण्डी थाना क्षेत्र के जिलिंग गांव के निवासी हैं।

वीडियो सबूत, फिर भी मामला पलटने की कोशिश

श्रीमती महतो ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई की पूरी घटना उनके पास मोबाइल वीडियो में दर्ज है। बावजूद इसके, बाद में ट्रकों के मालिकों द्वारा यह दावा किया गया कि वही गाड़ियाँ सुबह 7 बजे तिरुलडीह के सरकारी बालू घाट में खड़ी थीं। यह दिखाने का प्रयास किया गया कि वे वैध बालू लाने के क्रम में थीं। जबकि, वे दोनों गाड़ी रात से लेकर अगले दिन सुबह 11 बजे तक सिरूम चौक पर ही खड़ी थी।

पूर्व से दी गई थी सूचना, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं

मधुश्री महतो ने बताया कि 18 मार्च 2025 को उन्होंने पत्रांक 13/2025 एवं 14/2025 के तहत उपायुक्त, DIG, पुलिस अधीक्षक, जिला खनन पदाधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी को अवैध बालू कारोबार रोकने के संबंध में पत्र सौंपा था। इसके बाद उपायुक्त द्वारा आदेश संख्या 1140, दिनांक 25 अप्रैल 2025 को संवेदनशील क्षेत्रों में दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई थी। बावजूद इसके तिरुलडीह क्षेत्र में हर रात अवैध रूप से बालू का परिवहन बदस्तूर जारी है।

CCTV फुटेज की माँग और गलत केस का विरोध

महतो ने कहा कि सिरूम चौक और तिरुलडीह समेत अन्य स्थानों पर पहले से CCTV कैमरे लगे हैं। अगर प्रशासन घटना की रात का फुटेज सार्वजनिक करे, तो सच्चाई साफ हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उसी हाईवा गाड़ी को बाद में सरकारी घाट में खड़ा दिखाकर उन्हें झूठा साबित करने की कोशिश की गई है, जो अत्यंत ही गंभीर मामला है।

मधुश्री महतो ने सवाल किया कि — अगर हाईवा वैध चालान पर चल रही थी, तो रात को ही क्यों? तिरुलडीह से नीमडीह के बीच कई बार बालू लदे हाईवा पलट चुके हैं, उन मामलों का क्या हुआ? उन्हें रात में पीछा किए जाने की सूचना भी प्रशासन को दी गई, उस पर कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?

झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश : महतो

उन्होंने कहा कि “सरकार के एक अंग के रूप में एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मैं कभी किसी गलत मंशा से कार्य नहीं करती। लेकिन आज सच्चाई उठाने की सजा मुझे और मेरे सहयोगियों को झूठे केस में फँसाकर दी जा रही है।”

कानून सम्मत कार्रवाई की माँग, नहीं तो आमरण अनशन की चेतावनी

मधुश्री महतो ने मांग की कि – 12 जुलाई की रात पकड़ी गई गाड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि प्रशासन द्वारा दिया गया विवरण भ्रामक पाया जाता है, तो दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही झूठे केस में फँसाने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कड़ी विधिक कार्रवाई हो।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 

यदि उनकी मांगों की पूर्ति नहीं होती है तो वे जनता के साथ मिलकर आमरण अनशन पर बैठेंगी।

प्रशासन की भूमिका संदिग्ध: जनता देख रही है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि सरकार के पंचायती राज अधिनियम, 2001 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए वे काम कर रही हैं। उन्होंने दोहराया कि कुछ लोगों द्वारा उनके खिलाफ साजिश की जा रही है, लेकिन वे जनहित में डटी रहेंगी।

बहरहाल, यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की आवाज़ को दबाने और बालू माफियाओं को बचाने की कथित कोशिश के रूप में सामने आ रहा है। आने वाले समय में यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह एक बड़ा जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

 

रिपोर्ट : ManbhumUpdates.com विशेष संवाददाता

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