चांडिल की सड़कों पर पसरी गंदगी, बढ़ती बीमारियां – डैम रोड बना डंपिंग यार्ड, मोर्निंग वॉक छोड़ने को मजबूर लोग

चांडिल , 30 जुलाई : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले का चांडिल अनुमंडल 31 अगस्त 2003 को अस्तित्व में आया था। लेकिन 22 वर्षों बाद भी चांडिल की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। चाहे बात हो स्वच्छता की, स्वास्थ्य सुविधाओं की या पक्की सड़कों की—जनता आज भी बदहाली में जीने को मजबूर है।
हाल के दिनों में चांडिल बाजार और उसके आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा बामनी नाला के समीप सड़क किनारे फेंका जा रहा है। इस लापरवाही से जहां एक ओर नाला का पानी प्रदूषित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सड़क किनारे गंदगी का अंबार और उससे फैल रही दुर्गंध ने स्थानीय निवासियों का जीना दुश्वार कर दिया है।

सुबह की सैर बंद, बीमारियों का खतरा
बामनी नाला के समीप चांडिल डैम रोड, जो सुबह के समय वॉकिंग ट्रैक के रूप में लोकप्रिय था, अब बदबू और गंदगी से भर गया है। नियमित रूप से टहलने जाने वाले कई लोगों ने मोर्निंग वॉक बंद कर दिया है। स्थानीय निवासी कहते हैं कि गंदगी के चलते मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और संक्रमणजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।
डैम रोड से गुजरते हैं सरकारी अफसर और पर्यटक
यह वही डैम रोड है जिससे होकर अनुमंडल कार्यालय, व्यवहार न्यायालय, स्वर्णरेखा पुनर्वास कार्यालय, एवं चांडिल डैम नौका विहार तक पहुंचा जाता है। यहां रोज़ दर्जनों सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और पर्यटक आवाजाही करते हैं। इसके बावजूद, न तो स्थानीय प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस गम्भीर समस्या पर ध्यान दिया है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता चांडिल को विकास से कोसों दूर रखे हुए है। बामनी नाला के किनारे फेंके जा रहे कूड़े को लेकर न तो कोई नियमित निपटान की व्यवस्था है और न ही जिम्मेदारी तय की गई है।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शीघ्र ही गंदगी की सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका यह भी कहना है कि पर्यटकों के सामने क्षेत्र की यह तस्वीर शर्मिंदगी का कारण बन रही है।



