चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर अधूरे निर्माण के बावजूद आठ माह से वसूला जा रहा टोल टैक्स, स्थानियों में असंतोष —- क्या यह भी सांसद सह केंद्रीय मंत्री संजय सेठ की उपलब्धि मानी जाए?

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चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर अधूरे निर्माण के बावजूद आठ माह से वसूला जा रहा टोल टैक्स, स्थानीय में असंतोष—- क्या यह भी सांसद सह केंद्रीय मंत्री संजय सेठ की उपलब्धि मानी जाए?

चांडिल, 30 जुलाई : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाले चांडिल-पुरुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-32) पर अधूरे निर्माण कार्यों के बावजूद बीते आठ माह से टोल टैक्स वसूली की जा रही है। यह स्थिति अब स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और असंतोष का कारण बन चुकी है।

नीमडीह थाना क्षेत्र के पितकी व जामडीह तथा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के श्यामनगर और कांटाडीह में बनने वाले चार रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अब तक अधूरा है। इसके अलावा चांडिल के घोड़ानेगी मोड़ से पितकी तक का वैकल्पिक मार्ग (बाईपास रोड) भी हाल ही में—लोकार्पण के महज एक सप्ताह पहले—जल्दबाजी में पूरा किया गया।

इसके बावजूद, एनएचएआई द्वारा नीमडीह प्रखंड के तेतलों(लुपुंगडीह) के सामने बीते आठ महीनों से टोल टैक्स वसूला जा रहा है। विगत रविवार को केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री सह सांसद संजय सेठ और ईचागढ़ विधायक सविता महतो ने संयुक्त रूप से इस अधूरे मार्ग के घोड़ानेगी-पितकी खंड का औपचारिक लोकार्पण किया। स्थानीयों का सवाल है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ है, तो फिर टोल टैक्स की वसूली किस आधार पर हो रही है? क्या यह भी सांसद की ‘उपलब्धि’ है?

चांडिल अनुमंडल में दो-दो टोल प्लाजा, स्थानीयों पर दोहरी मार

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में पहले से ही एनएच-33 (टाटा-रांची मार्ग) के पाटा स्थित टोल प्लाजा से टोल वसूली हो रही थी। अब एनएच-32 पर नीमडीह के तेंतलो-पाथरडीह में एक और टोल प्लाजा स्थापित कर दिया गया है। परिणामस्वरूप नीमडीह व कुकड़ू प्रखंड के लोगों को जमशेदपुर या जिला मुख्यालय सरायकेला जाने के लिए दो-दो टोल टैक्स चुकाने पड़ते हैं।

स्थिति और भी जटिल तब हो जाती है जब लोग प्रमंडल मुख्यालय चाईबासा जाते हैं—उन्हें तीन टोल प्लाजा (तेंतलो, गिद्दीबेड़ा और पांडराशाली) पार करने पड़ते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेंतलो-पाथरडीह टोल प्लाजा को झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर बंगाल की सीमा में शिफ्ट किया जा सकता था, जिससे स्थानीय निवासियों को राहत मिलती।

किसानों पर सबसे बड़ा असर: आमदनी से अधिक खर्च

नीमडीह व कुकड़ू प्रखंड के किसान सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं। ये किसान प्रतिदिन अपने उत्पादों को लेकर जमशेदपुर की मंडियों तक पहुंचते हैं। लेकिन अब दो-दो स्थानों पर टोल टैक्स अदा करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि सब्जी बिक्री से जो कमाई होती है, वह टोल टैक्स और परिवहन व्यय में ही समाप्त हो जाती है।

नीमडीह के झिमड़ी, लाकड़ी, हेवेन, चिंगड़ा-पाड़कीडीह, आदरडीह, बाड़ेडा सहित कई पंचायतों और कुकड़ू प्रखंड की सभी नौ पंचायतों के किसानों को हर दिन इस आर्थिक मार से गुजरना पड़ रहा है।

स्थानीयों ने उठाए सवाल, संवाद की कमी पर जताई नाराजगी

स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि चांडिल अनुमंडल क्षेत्र अब भी एक पिछड़ा क्षेत्र है, जहां आजीविका का मुख्य साधन खेती-बाड़ी ही है। ऐसे में बिना स्थानीय रायशुमारी के दो-दो टोल प्लाजा स्थापित करना अनुचित है। लोगों का मानना है कि स्थानीय सांसद और एनएचएआई को टोल प्लाजा स्थापना से पूर्व जन संवाद करना चाहिए था।

चूंकि एनएचएआई केंद्र सरकार के अधीन है और वर्तमान सांसद संजय सेठ केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं, इसलिए स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि वे स्वयं पहल कर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएं।

चांडिल-पुरुलिया मार्ग पर अधूरे निर्माण कार्य के बीच जारी टोल वसूली, दोहरे टोल प्लाजा और किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान ने इस पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है। स्थानियों का सीधा सवाल है—क्या यह सब उस जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी नहीं बनती जो खुद केंद्र सरकार में मंत्री हैं और क्षेत्र के विकास का श्रेय लेना चाहते हैं?

अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार और एनएचएआई इस मसले पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या क्षेत्रीय सांसद इस मुद्दे को लेकर आम जनता की चिंता को समझते हैं या नहीं।

 

रिपोर्ट: ManbhumUpdates.com

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