कपाली में बड़ा जॉब स्कैम: नौकरी के नाम पर 250 युवक-युवतियां बने शिकार, पुलिस ने चार जालसाजों को दबोचा

चांडिल, 28 अगस्त : पूर्वी सिंहभूम जिले के मऊभंडार ओपी क्षेत्र में नौकरी और नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी क्षेत्र में एक और बड़ा जॉब स्कैम सामने आया है। तमोलिया बारी कॉलोनी और आसपास के इलाकों से कपाली पुलिस ने बुधवार को छापेमारी कर लगभग 150 युवक-युवतियों को बरामद किया। इस दौरान चार जालसाजों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें सुरेंद्र कुमार मुख्य आरोपी बताया जा रहा है।
ऐसे हुआ खुलासा
घटना तब सामने आई जब बुधवार को तमोलिया के एक घर से एक युवक किसी तरह भागकर पास के बड़े अस्पताल के गेट तक पहुंचा। उसने वहां ऑटो चालकों से टाटानगर रेलवे स्टेशन छोड़ने की गुहार लगाई। बातचीत में युवक ने बताया कि वह राजस्थान का रहने वाला है और उसका एक साथी अब भी बंधक बनाकर रखा गया है। यह सुनकर ऑटो चालकों और स्थानीय लोग तुरंत संदिग्ध मकान तक पहुंचे और एक जालसाज को पकड़ लिया। पूछताछ में सारा खेल उजागर हो गया।

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और मीडिया को सूचना दी। कपाली पुलिस मौके पर पहुंची और क्षेत्र के विभिन्न घरों से छापेमारी में 150 से अधिक युवाओं को मुक्त कराया। हालांकि, इस दौरान कई युवक और जालसाज मौके से फरार हो गए।
कैसे फंसाया गया युवाओं को
बरामद युवकों ने पुलिस को बताया कि उन्हें “बिनमेकर कंपनी” के नाम पर नौकरी देने का झांसा दिया गया था। इसके लिए प्रत्येक अभ्यर्थी से करीब 35 हजार रुपये और जरूरी दस्तावेज जमा कराए गए। लेकिन नौकरी देने के बजाय उन्हें नेटवर्क मार्केटिंग के काम में झोंक दिया गया। युवकों को अलग-अलग किराए के घरों में रखा गया था। जो विरोध करता, उसे कमरे में बंधक बनाकर पीटा जाता था।
कई राज्यों से आए थे पीड़ित
पुलिस के अनुसार, बरामद युवक-युवतियां झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा सहित कई राज्यों से लाए गए थे। प्रारंभिक जांच में अनुमान है कि इस गिरोह के जाल में 250 से अधिक युवक-युवतियां फंसे हुए हैं। पुलिस ने मौके से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं और गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस पर उठे सवाल
इस घटना के बाद कपाली पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब सैकड़ों युवाओं को महीनों तक अलग-अलग किराए के घरों में रखा गया, तो क्या पुलिस ने किरायेदारों का सत्यापन नहीं किया? क्या नियमित जांच नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि अगर स्थानीय लोगों ने जागरूकता दिखाकर सूचना नहीं दी होती तो शायद पुलिस को भनक भी नहीं लगती।
बेरोजगारों के लिए चेतावनी
यह घटना बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है। नौकरी के नाम पर भारी रकम और दस्तावेज सौंपने से पहले कंपनी और संस्थान की पूरी जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है। वरना ऐसे गिरोह बेरोजगारी की मजबूरी का फायदा उठाकर युवाओं को फंसा सकते हैं।



