पूर्वजों की जमीन का हवाला देकर ग्रामीणों ने की दुकानें खाली कराने की मांग, चांडिल गोलचक्कर पर हंगामा

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पूर्वजों की जमीन का हवाला देकर ग्रामीणों ने की दुकानें खाली कराने की मांग, चांडिल गोलचक्कर पर हंगामा

चांडिल, 01 अक्टूबर : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत टाटा-रांची एनएच-33 स्थित चांडिल गोलचक्कर में दुकानों को खाली कराने को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों और दुकानदारों के बीच विवाद हो गया। दुकान खाली कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा।

ग्रामीणों के अनुसार, गत 28 सितंबर को साहेरबेड़ा में ग्रामसभा आयोजित की गई थी। इसमें रूदिया पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण और गोलचक्कर के दुकानदार मौजूद थे। ग्रामीणों का दावा है कि ग्रामसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि गोलचक्कर स्थित सभी दुकानों को 15 दिनों के भीतर खाली किया जाएगा। इस दौरान दुकानदारों ने भी दुकान खाली करने पर सहमति जताई थी।

ग्रामीणों का तर्क है कि क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और ग्रामसभा के निर्णय का पालन किया जाना चाहिए। निर्धारित समय में दुकानें खाली नहीं होने पर गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण गोलचक्कर पहुंचे और दुकानों को खाली कराने की मांग करने लगे। इसी दौरान दुकानदारों के साथ उनकी तीखी बहस शुरू हो गई और मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

ग्रामीणों ने दावा किया कि जिस जमीन पर दुकानें संचालित हो रही हैं, वह उनके पूर्वजों की जमीन है। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने वर्षों पहले रोजी-रोजगार के उद्देश्य से लोगों को जमीन दी थी। अब उनके बच्चे बड़े हो गए हैं और वे उसी जमीन से अपने परिवार के लिए रोजगार का साधन विकसित करना चाहते हैं।

इधर, एक दुकानदार ने दावा किया कि वह पिछले करीब आठ वर्षों से बिजली बिल का भुगतान कर रहा है और उसके पास जमीन से संबंधित कागजात भी मौजूद हैं। दुकानदार पक्ष ने भी अपने अधिकार का दावा करते हुए तत्काल दुकान खाली करने पर आपत्ति जताई।

विवाद की सूचना मिलते ही चांडिल पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। चांडिल अंचल के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से अपने-अपने जमीन संबंधी दस्तावेज अंचल कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों की जांच के बाद भूमि पर वैध अधिकार रखने वाले पक्ष के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, मौके पर मौजूद ग्रामीण तत्काल दुकान खाली कराने की मांग पर अड़े रहे। काफी समझाने-बुझाने के बाद प्रशासन ने दुकानदारों को सात दिनों की मोहलत दी। इस अवधि में संबंधित पक्षों को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और मामले के समाधान के लिए प्रशासन के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया। प्रशासन की पहल के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल सहमति जताई और अपने-अपने घर लौट गए।

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