राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के उत्थान को लेकर कलाकारों की बैठक, चार सूत्री प्रस्ताव सरकार को भेजने की मांग

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राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के उत्थान को लेकर कलाकारों की बैठक, चार सूत्री प्रस्ताव सरकार को भेजने की मांग

सरायकेला, 20 अगस्त : राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला के पुनरुत्थान, छऊ कला के संरक्षण तथा कलाकारों के हित से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सरायकेला छऊ कलाकारों की महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार को गुंडिचा मंदिर परिसर में हुई। बैठक की अध्यक्षता सरायकेला छऊ आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महंती ने की। इसमें कला केंद्र की वर्तमान स्थिति समेत कला और कलाकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में पूर्व में उपायुक्त द्वारा विभागीय निर्देशों के आलोक में कार्रवाई के लिए चिन्हित किए गए चार प्रमुख बिंदुओं पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ठोस प्रस्ताव तैयार करने और उसे संबंधित विभाग एवं राज्य सरकार को शीघ्र भेजने की मांग पर कलाकारों ने सर्वसम्मति जताई। साथ ही निर्णय लिया गया कि कलाकारों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन को अनुमंडल पदाधिकारी, सरायकेला को सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से चारों बिंदुओं पर समयबद्ध कार्रवाई करते हुए प्रस्ताव राज्य सरकार को अग्रसारित करने का आग्रह किया जाएगा।

सरकार के प्रयासों पर जताया भरोसा

एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महंती ने कहा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से छऊ कला एवं कलाकारों के उत्थान की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं और कई कार्य प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि कलाकारों को उम्मीद है कि लंबित विषयों का भी जल्द समाधान होगा और राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को फिर से सशक्त एवं व्यवस्थित स्वरूप मिलेगा। कलाकार प्रशासन और सरकार के प्रयासों में सकारात्मक सहयोग के लिए तैयार हैं।

एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक चैत्र पर्व को भव्य स्वरूप देकर सरायकेला छऊ की प्रतिष्ठा बढ़ाने का कार्य किया है। राज्य सरकार भी कलाकारों के सम्मान, पेंशन, प्रशिक्षण और कला केंद्र के पुनरुत्थान की दिशा में पहल कर रही है। सामूहिक प्रयासों से सरायकेला छऊ की गौरवशाली पहचान को और मजबूत किया जा सकता है।

सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान है छऊ

बैठक में कलाकारों ने कहा कि सरायकेला छऊ महज एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत है। इस कला ने सरायकेला को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई है। क्षेत्र के कई गुरु एवं कलाकार पद्म सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार समेत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को पूर्ण रूप से सक्रिय, व्यवस्थित और सशक्त बनाना जरूरी है।

कलाकारों ने कहा कि छऊ की परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए कला केंद्र का संस्थागत सुदृढ़ीकरण, नियमित प्रशिक्षण, कलाकारों को उचित अवसर, सम्मान और आजीविका से जोड़ना आवश्यक है। इस दिशा में कलाकार जिला प्रशासन और राज्य सरकार के साथ सकारात्मक सहयोग के लिए सदैव तैयार हैं।

बैठक में भोला महंती, मनोज कुमार चौधरी, गुरु तपन कुमार पटनायक, रंजीत आचार्य, रजेतेंदु रथ, गोपाल कुमार पटनायक, कामेश्वर भोल, गोपाबंधु तांती, गणेश परीक्षा, उदित प्रताप सिंहदेव, कुसमी पटनायक, मुन्ना महाराणा, सरोज कपाट, होली कुमार, बुद्धेश्वर कुमार, बेलाद सिंह, तरुण कुमार भोल, निवारण महतो, चंद्र नारायण महंती, काली प्रसन्न सारंगी, राजेश गोप, पटम मुखी, पारस नाथ पुथाल, प्रदीप कुमार बसा, राकेश महंती, दशरथ महतो, शिव चरण साहू, राजेश महंती, रविन्द्र मोदक, शिव हेस्सा, पंकज कुमार साहू समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ एवं युवा कलाकार उपस्थित थे।

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