भक्ति ही भगवान की माया से मुक्ति का मार्ग : स्वामी सर्वानंद महाराज

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भक्ति ही भगवान की माया से मुक्ति का मार्ग : स्वामी सर्वानंद महाराज


जमशेदपुर, 13 फरवरी : साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को भक्तिरस की अविरल धारा बही। वृंदावन धाम से पधारे पूज्य संत स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति ही भगवान की माया से मुक्ति का एकमात्र मार्ग है।

स्वामी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि यह समस्त संसार भगवान की माया से आच्छादित है और जीव उसी माया में फंसकर जन्म-मरण के चक्र में भटकता रहता है। उन्होंने शुकदेव जी के चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि जन्म से ही वैराग्य और परमात्मा की अनन्य भक्ति को अपनाने के कारण वे सांसारिक मोह-माया से अछूते रहे। “यदि मनुष्य सच्चे हृदय से भगवान का स्मरण और भजन करे, तो माया उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती,” उन्होंने कहा।

महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने कौरव-पांडवों की कथा के माध्यम से धर्म और सत्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि धर्म की रक्षा के लिए भगवान स्वयं साथ खड़े होते हैं। महाभारत का युद्ध सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक है। “भगवान के यहां देर हो सकती है, लेकिन अंधेर नहीं होता। अंततः विजय सत्य की ही होती है,” उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा और जीवन की विषम परिस्थितियों में भी धर्ममार्ग पर अडिग रहने का संदेश दिया।

विदुर चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान जात-पात या ऊंच-नीच नहीं देखते, वे केवल सच्चे प्रेम और निष्काम भक्ति को स्वीकार करते हैं। विदुर जी का निष्कपट प्रेम ही उन्हें भगवान की विशेष कृपा का पात्र बनाता है। जो व्यक्ति निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करता है, भगवान स्वयं उसे गले लगाकर उसका कल्याण करते हैं।

कथा स्थल पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर कथा श्रवण करते रहे। कार्यक्रम में गोपी बाबू, सुभाष चंद्र शाह, डॉ. डीपी शुक्ला, शंकर लाल सिंघल, मगन पांडे, नीरज तिवारी, रोहित मिश्रा, जेके शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

आयोजकों ने बताया कि कथा के आगामी दिनों में भी श्रीमद्भागवत के विभिन्न दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाने की अपील की गई।
आज की कथा के मुख्य जजमान डॉ. डीपी शुक्ला, ‘चमकता आईना’ के संपादक बृज भूषण सिंह ‘छोटकु भैया’, नीरज तिवारी तथा अंजनी पांडे अपनी धर्मपत्नी के साथ उपस्थित रहे। प्रातःकाल सभी जजमानों ने अपने पूर्वजों की विधिवत पूजा-अर्चना की। संध्या में भागवत भगवान की आरती संपन्न हुई तथा आज की कथा का समापन जजमानों द्वारा महाआरती के साथ किया गया।

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