भागवत अमृत वर्षा से सराबोर हुआ रामलीला मैदान, शुकदेव–परीक्षित प्रसंग ने जगाई भक्ति चेतना

जमशेदपुर, 13 फरवरी : साकची स्थित ऐतिहासिक श्रीरामलीला मैदान गुरुवार को पूर्णतः भक्तिरस में डूबा नजर आया। राम-कृष्ण मित्र मंडल ‘श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट’ के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर “हरि बोल” व “राधे-श्याम” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
श्रीधाम वृंदावन से पधारे संत स्वामी सर्वानंद महाराज ने व्यासपीठ से भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप है। इसका श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से अंत:करण की शुद्धि होती है और जीवन में धर्म, भक्ति एवं वैराग्य का संचार होता है।
स्वामी जी ने नैमिषारण्य में हुए सूत-शौनकादि संवाद का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब कलियुग में जीवों के कल्याण का मार्ग पूछा गया, तब सूत जी ने भागवत कथा को ही सर्वोत्तम उपाय बताया। आज भी वही संदेश मानव समाज के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने कहा कि भागवत श्रवण से पापों का क्षय होता है और मनुष्य ईश्वर से सीधा संबंध स्थापित करता है।
राजा परीक्षित के शाप और शुकदेव जी के आगमन का भावपूर्ण वर्णन करते हुए स्वामी जी ने बताया कि जब परीक्षित को सात दिन में मृत्यु का श्राप मिला, तब उन्होंने राजसुख त्यागकर गंगा तट पर संतों की शरण ली। उसी समय परमब्रह्म स्वरूप श्री शुकदेव जी प्रकट हुए और सात दिनों तक भागवत कथा का उपदेश देकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि यदि मृत्यु का भय भी मनुष्य को भगवान की शरण में ले जाए, तो वही भय मोक्ष का द्वार बन जाता है।
कथा के दौरान उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि देवता अमृत कलश लेकर कथा श्रवण हेतु पहुंचे, किंतु उन्हें भी भागवत श्रवण का अधिकार नहीं मिला। इससे मानव जन्म की महत्ता और भागवत कथा की दुर्लभता का बोध होता है। हरिनाम, सत्संग और भक्ति ही जीवन का वास्तविक धन है।
नारद भक्ति प्रसंग का वर्णन करते हुए स्वामी जी ने ज्ञान और वैराग्य की महिमा प्रतिपादित की। आत्मदेव और धुंधकारी की कथा के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि अधर्म और विषय-वासनाओं में फंसा व्यक्ति भी यदि सच्चे मन से भक्ति का आश्रय ले, तो उसका उद्धार निश्चित है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन रहे।
इस अवसर पर डॉ. डीपी शुक्ला, शंकर लाल सिंघल, अनिल कुमार चौबे, मनोज कुमार मिश्रा, मगन पांडेय, सुरेश पांडेय, अवधेश मिश्रा, सुभाष चंद्र शाह, दिलीप तिवारी, प्रदीप चौधरी, नीरज तिवारी सहित अनेक गणमान्यजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन समिति ने जानकारी दी कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन आगामी दिनों में भी प्रतिदिन सायंकाल जारी रहेगा और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर जीवन को धन्य बनाने की अपील की गई है।



