ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय में आदिवासियों ने भरी हुंकार, कहा राज्य को अस्थिर करने का हो रहा प्रयास

ईचागढ़, 04 अक्टूबर : संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन चांडिल अनुमंडल के बैनर तले शनिवार को ईचागढ़ प्रखंड के गौरांगकोचा में आदिवासी जनाक्रोश रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों के साथ शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद किया।
रैली ईचागढ़ प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में तब्दील हो गया। विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कुड़मियों के आदिवासी बनने की मांग को तीन बार नकार दिया गया है। बावजूद इसके कुड़मी समुदाय कभी रेल लेकर तो कभी अन्य प्रकार का आंदोलन कर सरकार पर जबरन आदिवासी बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और राज्य को अस्थिर करने का प्रयास है।

राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम सौंपा पत्र
इसके पूर्व संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल प्रखंड विकास पदाधिकारी को देश के राष्ट्रपति और राज्य के राज्यपाल के नाम तीन सूत्री मांग पत्र सौंपा। पत्र में कुड़मी/कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल नहीं करने, सरना धर्म कोड को मान्यता देने और झारखंड में पेसा कानुन लागु करने की मांग की गई है।
वक्ताओं ने कहा कि कुड़मी – कुरमी समुदाय आदिवासी नहीं, बल्कि एक किसान समुदाय है। जो आदिवासियों के साथ रहते आ रहे हैं, लेकिन उनकी परंपराएं, वेशभूषा और धार्मिक अनुष्ठान आदिवासियों से अलग है।
जैसे कि उनमें दहेज प्रथा का प्रचलन है। जबकि आदिवासियों में दहेज प्रथा नहीं है। कुड़मी – कुरमी मूल रुप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िसा में निवास करते है। आदिवासी एक स्वदेशी समुदाय है। जो भारत की मूलनिवासी है। जिसकी अपनी विशिष्ठ पहचान, वेशभूषा, संस्कृति और अलग भाषाएं है।

आदिवासियों का हक छीनने का हो रहा प्रयास
प्रखंड मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदायों कि मांग है कि कुड़मी – कुरमी जाति को एसटी सूची में शामिल नहीं किया जाए। दरअसल, कुड़मी समुदाय के लोग आदिवासियों के हक और अधिकतर छीनने का प्रयास कर रहे हैं।
कार्यक्रम में विभिन्न आदिवासी समुदायों के सामाजिक संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए इनमें मुख्य रूप से मानिक सिंह सरदार, श्यामल मार्डी, प्रकाश मार्डी, डोमन बास्के, शिलू सारना, सुचांद उरांव, विश्वनाथ उरांव, लंबू पहाड़िया समेत बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष शामिल थे।



