हरियाणा में मिट्टी धंसने से मृत 7 मजदूरों के परिजनों को 40-40 लाख मुआवजा और नौकरी, मृतकों में ईचागढ़ के दो और जादूगोड़ा के चार श्रमिक

चांडिल, 12 मार्च : हरियाणा के भिवाड़ी स्थित दिल्ली-जयपुर हाईवे के कापड़ियावास क्षेत्र में सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी की एक निर्माणाधीन साइट पर खुदाई के दौरान हुए हादसे में मरने वाले श्रमिकोें के परिजनों को 40-40 लाख रुपये मुआवजा और एक-एक नौकरी देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मृतकोें के शवों को उनके घरों तक सम्मान पूर्वक पहुंचाया जाएगा। यह जानकारी स्थानीय सांसद सह केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के हवाले से दी गई है। बताया गया कि घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर राहत को लेकर बैठक भी हुई।
जमशेदपुर के सांसद भी रहे शामिल
बैठक में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सह रांची के सांसद संजय सेठ, जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, संबंधित क्षेत्र के उपायुक्त अजय कुमार, पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा, एसडीएम मानेसर दर्शन यादव तथा सहायक श्रम आयुक्त अनिल शर्मा मौजूद थे। बताया गया कि रक्षा राज्य मंत्री और जमशेदपुर के सांसद के सामूहिक प्रयास से सभी मृतकों के परिजनों को 40-40 लाख रुपये मुआवजा, पार्थिव शरीर को उनके पैतृक आवास तक भेजने तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का निर्णय लिया गया है।
क्या है घटना
दिल्ली-जयपुर हाईवे के कापड़ियावास क्षेत्र में सिग्नेचर ग्लोबल सोसाइटी की एक निर्माणाधीन साइट पर खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंसने से कुल सात मजदूरों की मौत हो गई थी। मिली जानकारी के अनुसार हादसे के बाद प्रशासन और बचाव दल ने तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया था। कई मशीनों की मदद से मलबा हटाकर सभी सात मजदूरों को बाहर निकाला कर उन्हें भिवाड़ी के राजकीय जिला अस्पताल पहुंचाया गया था, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
मृतकों में छह झारखंड के
मृतकों में झारखंड के कुल छह मजदूर शामिल थे। मृतकों की पहचान सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड के बुरुहातू निवासी शिवशंकर सिंह मुंडा (30) व हुंडी निवासी परमेश्वर महतो (50) और पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड अंतर्गत जादूगोड़ा थाना क्षेत्र की हाथीबिंदा पंचायत के बनगोड़ा गांव निवासी मंगल महतो, धनंजय महतो, भागीरथ गोप व संजीव गोप के रूप में की गई है। हादसें की सूचना मिलने पर मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। सभी परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बैठक में लिए गए निर्णय से मृतक मजदूरों के परिजनों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



