कुड़मी, महतो को एसटी सूची में शामिल करने के विरोध में नीमडीह में आदिवासी आक्रोश रैली

नीमडीह, 11 अक्टूबर : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड में शनिवार को संयुक्त आदिवासी सामाजिक संगठन के बैनर तले कुरमी/कुड़मी महतो समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के विरोध में विशाल आदिवासी आक्रोश रैली निकाली गई। रैली की अध्यक्षता मानिक सिंह सरदार ने की। मौके पर हजारों की संख्या में आदिवासी पुरुष और महिलाएं शामिल हुए। रैली रघुनाथपुर डाक बंगला से प्रारंभ होकर प्रखंड कार्यालय नीमडीह पहुंची, जहां प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम तीन सूत्री ज्ञापन सौंपा गया।
संगठन ने ज्ञापन में मांग की है कि कुड़मी महतो समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के किसी भी प्रस्ताव को तत्काल खारिज किया जाए। यह कदम आदिवासी समाज के आरक्षण, अधिकार और सांस्कृतिक पहचान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। आदिवासी समाज ने सरकार से अपील की कि वह आदिवासी समुदाय की भावनाओं का सम्मान करे, अन्यथा संगठन को आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
सभा को संबोधित करते हुए मानिक सिंह सरदार ने कहा कि झारखंड सरकार ने 8 दिसंबर 2004 और 6 जनवरी 2005 को कुरमी/कुड़मी (महतो) समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। बाद में 10 फरवरी 2015 को टीआरआई द्वारा प्रस्तुत नृवंशविज्ञान रिपोर्ट में यह स्पष्ट कहा गया कि कुरमी/कुड़मी महतो समुदाय “कुनबी” की उपजाति है और अनुसूचित जनजाति के लिए आवश्यक मापदंडों को पूरा नहीं करता। इसके बाद 31 जुलाई 2015 को भारत सरकार ने राज्य सरकार को सूचित किया कि इस विषय पर आगे कोई कार्रवाई लंबित नहीं है।
उन्होंने कहा, इसके बावजूद कुरमी/कुड़मी महतो समुदाय हठधर्मिता दिखाते हुए रेल टेका जैसे आंदोलन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। यह मांग आदिवासी हितों के विरुद्ध है और हम इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। रैली के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और बैनर-स्लोगन के माध्यम से अपनी एकजुटता दिखाई। पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा और इसमें महिलाओं व युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।



