“अंतिम क्षण में भी हरि-स्मरण से संभव है मोक्ष” : स्वामी सर्वानंद महाराज

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“अंतिम क्षण में भी हरि-स्मरण से संभव है मोक्ष” : स्वामी सर्वानंद महाराज

जमशेदपुर, 15 फरवरी : साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की अविरल धारा प्रवाहित हुई। वृंदावन धाम से पधारे पूज्य संत स्वामी सर्वानंद जी महाराज ने व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत महापुराण की दिव्य महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का साक्षात स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से जीव का कल्याण संभव है।

महाराज श्री ने श्रीकृष्ण लीला का भावपूर्ण वर्णन करते हुए गोवर्धन पूजा प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का हरण कर ब्रजवासियों की रक्षा की, तब यह संदेश दिया कि परमात्मा सदैव अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। झूला उत्सव और छप्पन भोग की झांकी के वर्णन के दौरान पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

कथा क्रम में विदुर-मैत्रेय संवाद का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि जब जीव विनम्र भाव से सत्य की खोज करता है, तब उसे दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है। मनु-शतरूपा की संतानों, सनकादि ऋषियों के शाप से जय-विजय के हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु के रूप में अवतार तथा भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति मार्ग में बाधाएं अवश्य आती हैं, किंतु सच्चा भक्त कभी विचलित नहीं होता।

देवहूति और कपिल भगवान के उपदेशों के माध्यम से सांख्य दर्शन का सार प्रस्तुत करते हुए उन्होंने जीवन में आत्मचिंतन की आवश्यकता बताई। दक्ष प्रजापति और भगवान शिव के प्रसंग से उन्होंने अहंकार को पतन का कारण तथा समर्पण को उत्थान का मार्ग बताया। ऋषभदेव चरित्र और पुनर्जन्म सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे भगवद्भक्ति में लगाना ही सच्ची सफलता है।

अजामिल कथा, गजेन्द्र मोक्ष और विभिन्न हरि अवतारों का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा, “यदि अंतिम समय में भी सच्चे हृदय से भगवान का स्मरण किया जाए तो मोक्ष संभव है।” देवासुर संग्राम, समुद्र मंथन और वामन भगवान की कथा के माध्यम से धर्म और अधर्म के शाश्वत संघर्ष का आध्यात्मिक संदेश भी उन्होंने स्पष्ट किया।

सूर्यवंश में भगवान श्रीराम और चंद्रवंश में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण प्रसंग पर बधाई गीतों से पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भजन-कीर्तन में भावविभोर होकर झूमते रहे।

आज के यजमान के रूप में गोपी बाबू, शंकर लाल सिंघल, अनिल अग्रवाल एवं श्याम अग्रवाल सपत्नीक पूजा-अर्चना में शामिल हुए और विधिवत आरती कर कथा का पुण्य लाभ प्राप्त किया। आयोजन समिति के अनुसार प्रतिदिन सायं भव्य आरती, पुष्पवर्षा एवं प्रसाद वितरण किया जा रहा है।

कथा स्थल को आकर्षक पुष्प सज्जा एवं विद्युत रोशनी से सुसज्जित किया गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित कथा श्रवण हेतु पहुंच रहे हैं। अंत में संत श्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत का श्रवण जीवन में शांति, प्रेम और सदाचार का संचार करता है तथा समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता है।

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