अवैध अफीम नेटवर्क पर पुलिस का ‘फुल फ्रंटल अटैक’, DGP ने दिए ज़ीरो टॉलरेंस के संकेत

MANBHUM UPDATES
2 Min Read

अवैध अफीम नेटवर्क पर पुलिस का ‘फुल फ्रंटल अटैक’, DGP ने दिए ज़ीरो टॉलरेंस के संकेत

रांची, 08 जनवरी : झारखंड में अवैध अफीम की खेती और मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे को लेकर राज्य पुलिस ने सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। DGP तदाशा मिश्र की अध्यक्षता में गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अब कार्रवाई केवल खेती के विनष्टीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे अवैध नेटवर्क—उत्पादन से लेकर तस्करी और वित्तीय लाभ तक—को ध्वस्त किया जाएगा।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस बैठक में राँची, चतरा, पलामू, चाईबासा, हजारीबाग, लातेहार, सरायकेला-खरसावां और खूँटी जैसे सर्वाधिक प्रभावित जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने हिस्सा लिया। बैठक में वर्ष 2025 के दौरान किए गए अफीम विनष्टीकरण की प्रगति, 2024–25 के फसलीय वर्ष में नष्ट की गई भूमि के जीआर सत्यापन, दर्ज एनडीपीएस मामलों की स्थिति और बड़े तस्करों पर की गई कार्रवाई की गहन समीक्षा की गई।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि केवल खेतों को नष्ट करना पर्याप्त नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए डीजीपी ने निर्देश दिया कि एनडीपीएस मामलों में आपसी लिंक की पहचान कर संगठित गिरोहों को चिन्हित किया जाए, विभिन्न एजेंसियों के साथ संयुक्त अभियान चलाए जाएं और तकनीक व सामुदायिक सहभागिता का अधिकतम उपयोग किया जाए। साथ ही, नशे के अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों पर प्रभावी कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

बैठक में जागरूकता अभियानों और वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में अफीम की खेती की निर्भरता को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सके। डीजीपी के निर्देशों से यह संकेत साफ है कि राज्य में नशे के खिलाफ लड़ाई अब बहुआयामी और निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।

Share This Article