गैर राजनीतिक स्वतंत्र छात्र संगठन “ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन”(आजसू) का होगा पुनर्गठन : ललित

रांची, 02 सितंबर : रांची के मोराबादी स्थित प्रेस क्लब में मंगलवार को झारखंड आंदोलनकारी संपर्क समिति के बैनर तले झारखंड आंदोलनकारियों का जुटान हुआ। इस अवसर पर आंदोलनाकरियों ने झारखंड राज्य गठन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए पुनः एकजुट होकर आंदोलन के माध्यम से आवाज बुलंद करने पर चर्चा किए। इसकी जानकारी संवाददाता सम्मेलन में दी गई। संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से झारखंड आंदोलनकारी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन आजसू बृहत झारखंड के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष सह झारखंड आंदोलनकारी संपर्क समिति के मुख्य संयोजक ललित कुमार महतो ने संबोधित किया। संवाददाता सम्मेलन में मुख्य रूप से हीरा नाथ साहू, रामजी भगत, ऐनुल अंसारी, रंजीत उरांव, सागर महतो, छब्बू लाल महतो सहित दर्जनों झारखंड आंदोलनकारी साथी मौजूद थे।
ललित महतो ने कहा कि “भाषा संस्कृति और खतियान, झारखंडियों की एक पहचान” के आधार पर स्थानीय एवं नियोजन नीति लागू करने तथा पेशा कानून और बन अधिनियम 2006 को पूर्ण रूपेण लागू करने पर ही झारखंडवासियों का कल्याण होगा। जिससे ग्राम सभा का अधिपत्य भी कायम होगा। केंद्र और राज्य सरकार किसी भी राजस्व मौजा मे निजी संपत्ति/जमीन, वन भूमि, गैर मजुरवा भूमि जिसमे आदिवासी या मूलवासी जो वर्षों से निवास करते हों, या खेती करते आ रहे हैं, या बन भूमि तथा खनिज संपदा पर आश्रित हैं, उसे अधिग्रहण नहीं कर सकती है। पेशा कानून में पांचवी अनुसूची क्षेत्र के निवास करने वाले सभी आदिवासी और मूलवासी पर समान अधिकार दिया है, किसी जाति या धर्म पर कोई भेद भाव नहीं है।
सम्मेलन में वक्ताओं ने प्रार्थमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक छः जनजातीय (कुढ़ुख, कुरमाली, हो, मुंडारी, संथाली, खड़िया) तीन क्षेत्रीय (पंचपरगणियां, नागपुरिया, खोरठा) भाषाओं पर पढ़ाई होना चाहिए और नियोजन नीति में भी इन भाषाओं के आधार पर नियुक्ति पर प्रार्थमिकता होना चाहिए। ताकि स्थानीय लोगो को रोजगार मिले और भाषा संस्कृति की भी रक्षा हो। संवाददाता सम्मेलन में सारे आंदोलनकारी साथी एक स्वर में कहा कि गैर राजनीतिक स्वतंत्र छात्र संगठन “ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन”(आजसू) का पुनर्गठन कर छात्र नवजवानों को जिम्मेवारी सौंपी जाएगी, जो झारखंड राज्य गठन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।



