जावा, करम डाली और भाई-बहन के प्रेम के बीच पदमपुर में मना करम पर्व
सरायकेला, 22 सितंबर : जिला मुख्यालय के समीप ग्राम पदमपुर में मंगलवार को प्रकृति का पर्व करम पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। झारखंड आंदोलनकारी धनपति सरदार के आवास पर आयोजित पूजा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए।
करम पूजा को लेकर बहनों ने उपवास रखा। देर शाम करम डाली को पूजा स्थल पर लाकर जावा के साथ स्थापित किया गया। जावा की टोकरियों को फूल, सिंदूर और रंग-बिरंगे धागों से सजाया गया। इसके बाद पारंपरिक विधि-विधान के साथ करम राजा की पूजा-अर्चना की गई।
पूजा के मुख्य पुजारी सुधीर सरदार ने श्रद्धालुओं को करम पूजा से जुड़ी कारमू और धरमू दो भाइयों की पारंपरिक कथा सुनाई। उन्होंने करम वृक्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे शक्ति, युवावस्था और समृद्धि का प्रतीक बताया।
इस मौके पर एमपी सिंह सरदार ने कहा कि करम पूजा और जावा का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारंपरिक आस्था से जुड़ा है। जावा बोने से लेकर करम डाली की स्थापना और पूजा तक की परंपरा विधि-विधान से निभाई जाती है।
उन्होंने कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान के साथ आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का माध्यम है। पूजा के दौरान सुख-समृद्धि और भाई-बहन की लंबी उम्र की कामना की गई।
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। मादल और नगाड़े की थाप पर महिलाओं ने पारंपरिक करम नृत्य प्रस्तुत किया। इससे पूरा माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण हो गया। कार्यक्रम में गांव के बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा और श्रद्धालु मौजूद रहे।



