संवेदनशीलता और साहस की मिसाल बना पत्रकार का अभियान, एक असहाय महिला को मिला नया जीवन

सरायकेला/चांडिल, 23 जनवरी : कभी-कभी एक जिम्मेदार नागरिक की संवेदनशीलता पूरे समाज को शर्मसार होने से बचा लेती है। ऐसा ही एक उदाहरण गुरुवार को चांडिल थाना क्षेत्र के चिलगु में देखने को मिला, जहां एक संवेदनशील पत्रकार की तत्परता और मानवीय सोच ने एक असहाय, विक्षिप्त गर्भवती महिला की जान बचा ली।
गुरुवार सुबह करीब 8:30 बजे चिलगु इलाके में सड़क किनारे एक विक्षिप्त गर्भवती महिला लहूलुहान हालत में पड़ी मिली। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, महिला की मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों द्वारा उसके साथ दुष्कर्म किया गया था, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई है। दर्दनाक स्थिति यह थी कि मौके से गुजरने वाले कई लोग उसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ते रहे।
इसी बीच स्थानीय पत्रकार विश्वरूप पांडा की नजर महिला पर पड़ी। उन्होंने इसे एक खबर भर नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी समझा। बिना समय गंवाए उन्होंने सबसे पहले चाइल्ड लाइन को सूचना दी और मामला दर्ज कराया। इसके बाद उन्होंने प्रेस क्लब के संरक्षक संतोष कुमार को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। प्रेस क्लब के माध्यम से उपायुक्त नितीश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक मुकेश लूनायत, महिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा सखी वन स्टॉप सेंटर की कार्यकर्ता पूर्णिमा नायक को तत्काल जानकारी दी गई।
उपायुक्त नितीश कुमार सिंह ने अपनी व्यस्तताओं के बावजूद मामले को गंभीरता से लेते हुए मातहत अधिकारियों को महिला के तत्काल रेस्क्यू का निर्देश दिया। वहीं पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लूनायत ने चांडिल अनुमंडल पुलिस को मौके पर महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने और टीम के पहुंचने तक डटे रहने का आदेश दिया।
इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और वह कई बार बेहोश हो रही थी। ऐसे कठिन समय में पत्रकार विश्वरूप पांडा ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए प्राथमिक मरहम-पट्टी की व्यवस्था कराई। उन्होंने चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी, थाना प्रभारी, अनुमंडलीय स्वास्थ्य केंद्र के उपाधीक्षक, स्थानीय मुखिया, ग्राम प्रधान समेत तमाम प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार संपर्क कर मदद की अपील की।
करीब तीन बजे सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि महिला न केवल विक्षिप्त थी बल्कि गर्भवती भी थी और उसके सिर पर गंभीर चोट थी। भीड़ देखते ही वह भागने या पत्थर से हमला करने का प्रयास कर रही थी। काफी मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित पकड़कर चांडिल अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे रांची स्थित रिनपास रेफर करने की सलाह दी।
समय की बाध्यता के कारण गुरुवार को उसे रांची ले जाना संभव नहीं हो सका, जिसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महिला को सरायकेला सदर अस्पताल में रखा गया। महिला सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में पूरी रात उसका इलाज चलता रहा और शुक्रवार को उसे रांची रिनपास भेज दिया गया।
इस पूरे अभियान में उपायुक्त नितीश कुमार सिंह की सक्रिय भूमिका, पुलिस प्रशासन की तत्परता और सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम का सहयोग सराहनीय रहा। खासकर पत्रकार विश्वरूप पांडा और सामाजिक कार्यकर्ता पूर्णिमा नायक के प्रयासों से एक संभावित बड़ी अनहोनी टल गई।
हालांकि रेस्क्यू के दौरान व्यवस्था की कुछ खामियां भी सामने आईं, लेकिन पत्रकार विश्वरूप पांडा ने मामले को जिस तरह से गंभीरता से लिया था और प्रशासन की सतत मॉनिटरिंग से स्थिति को समय रहते संभाल लिया गया।
यह घटना समाज को एक गहरा संदेश देती है कि यदि हर नागरिक, खासकर मीडिया से जुड़े लोग, अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझें और संवेदनशीलता के साथ आगे आएं, तो कई जिंदगियों को अंधेरे से रोशनी की ओर ले जाया जा सकता है। पत्रकार विश्वरूप पांडा की भूमिका न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत भी है।



