“इट्टे के अभय ने रचा इतिहास : नक्सल प्रभावित गांव से निकला जेपीएससी का सितारा”

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“इट्टे के अभय ने रचा इतिहास : नक्सल प्रभावित गांव से निकला जेपीएससी का सितारा”

“शहीद पिता का सपना बना प्रेरणा – खूंटी के अभय कुजूर बने JPSC सेकेंड टॉपर”

खूंटी ,विशेष संवाददाता,26 जुलाई : कभी नक्सली हिंसा से सहमा हुआ, बुनियादी सुविधाओं से वंचित और विकास की राह ताकता खूंटी का एक छोटा सा गांव इट्टे – आज पूरे झारखंड में गर्व का कारण बन गया है। कारण हैं – अभय कुजूर, जिन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में दूसरा स्थान प्राप्त कर, न सिर्फ अपने गांव का नाम रौशन किया, बल्कि यह भी साबित किया कि प्रतिभा और हौसले किसी सुविधा की मोहताज नहीं होते।

अभय की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक के सफर का जीवंत दस्तावेज है। अभय का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनके पिता, स्वर्गीय अभिनाश कुजूर, भारतीय सेना में थे और 2009 में ओडिशा में एक नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त हो गए। उस घटना ने किशोर अभय के मन में गहरा प्रभाव डाला और उसी दिन उन्होंने तय कर लिया कि वे प्रशासनिक सेवा में जाएंगे और अपने क्षेत्र की तस्वीर बदलेंगे।

गांव में पक्की सड़क नहीं, स्वास्थ्य सेवाएं नहीं, और बिजली-पानी की व्यवस्था बेहद दयनीय। ऐसे माहौल में जहाँ बच्चों की पढ़ाई अक्सर बीच में ही छूट जाती है, वहीं अभय ने न हार मानी, न रुकना जाना। सीमित संसाधनों और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने खुद को तैयार किया और आज उनकी मेहनत रंग लाई।

उनकी यह उपलब्धि केवल इट्टे या खूंटी के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने यह दिखा दिया कि असली ताकत किसी को सुविधाएं मिलने में नहीं, बल्कि सपनों को जिंदा रखने और उन्हें पूरा करने की जिद में होती है।

आज अभय कुजूर हर उस युवा के लिए मिसाल हैं, जो पिछड़े इलाके से हैं, जो संसाधनों की कमी से जूझते हैं, लेकिन दिल में कुछ बड़ा करने का सपना रखते हैं।

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