लांडूपोदा गांव में करंट लगने से बिजली मिस्त्री गंभीर रूप से घायल, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

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लांडूपोदा गांव में करंट लगने से बिजली मिस्त्री गंभीर रूप से घायल, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

 

चक्रधरपुर, विशेष,1 अगस्त : कराईकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत लांडूपोदा गांव के आदिवासी टोला में शुक्रवार की दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। बिजली विभाग में अनुबंध पर कार्यरत मिस्त्री श्याम सुंदर रजक को ट्रांसफार्मर पर कार्य के दौरान 11,000 वोल्ट का करंट लग गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

सूत्रों के अनुसार, लोटापहाड़ गांव निवासी श्याम सुंदर को विभाग की ओर से लांडूपोदा गांव में स्थित एक ट्रांसफार्मर का फ्यूज ठीक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत शटडाउन लेकर कार्य प्रारंभ किया, लेकिन जैसे ही उन्होंने फ्यूज तार को जोड़ने का कार्य शुरू किया, अचानक लाइन में फिर से बिजली प्रवाहित कर दी गई, जिससे वे करंट की चपेट में आ गए।

हादसे में श्याम सुंदर ट्रांसफार्मर से नीचे गिर पड़े, जिससे उनकी पीठ की हड्डी टूट गई और दोनों पैर गंभीर रूप से घायल हो गए। शरीर के कई हिस्से झुलस गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों और सहकर्मियों की तत्परता से उन्हें तुरंत अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें टाटा टीएमएच अस्पताल रेफर कर दिया गया।

शटडाउन के बावजूद लाइन चालू? उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जब कार्य शटडाउन लेकर किया जा रहा था, तो बिना सूचना के लाइन दोबारा कैसे चालू हो गई? यह सवाल घटना के बाद सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। मौके पर पहुंचे विद्युत विभाग के एसडीओ भामा टूडू सहित अन्य अधिकारियों ने तत्काल एम्बुलेंस की व्यवस्था कर घायल मिस्त्री को बेहतर इलाज के लिए भेजा, लेकिन इस चूक ने विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

अनुबंधकर्मियों ने जताई नाराजगी, उच्चस्तरीय जांच की मांग

विद्युत विभाग में कार्यरत अनुबंधकर्मियों ने इस हादसे को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इसे “जानलेवा चूक” करार देते हुए कहा कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

घायल मिस्त्री के सहकर्मियों ने बताया कि विभागीय लापरवाही के कारण फील्ड में काम कर रहे मिस्त्रियों की जान हर दिन खतरे में रहती है। जब तक हर शटडाउन की स्पष्ट रिकार्डिंग और दोहरी जांच की व्यवस्था नहीं होगी, ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उन्होंने कहा— “हमें सुरक्षा गियर भी नहीं मिलते और अब तो जान भी खतरे में है।”

 

रिपोर्ट : www.manbhumupdates.com

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