शिवलिंग पर अपना दुध अपर्ण करती थी गाय, ग्रामीणों को मिली जानकारी तो बनाया मंदिर

डेस्क, 16 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में कई ऐसे शिव लिंग हैं जो सदियों पुराना और रहस्यमयी है। इन शिवलिंगों का रहस्य आज भी राज बना हुआ है। इन शिवलिंगों को लेकर क्षेत्र में कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। कुकडू प्रखंड के जारगो स्थित महादेवबेड़ा में ऐसा ही एक शिवलिंग है. इस शिवलिंग की महिमा अपरंपार है। यहां भोलेनाथ भक्तों की सच्चे मन से मांगी गई कामनाएं पूरीं करते हैं। प्राचीनकालीन शिवलिंग दूर-दूर तक विख्यात है। पवित्र सावन महीने में जारगो महादेवबेड़ा मंदिर में दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा के दर्शन-पूजन और जलाभिषेक करने के लिए भक्त कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

क्षेत्र में प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार एक चरवाहा उस स्थान पर अपने गाय-बैलों को चराने के लिए लाता था। इसी दौरान एक दुधारू गाय प्रतिदिन एक स्थान पर जाकर अपना दुध देती थी। कई दिनों से चरवाहा इस बात पर गौर कर रहा था। एक दिन चरवाहे ने इसकी पड़ताल की। वहां जाकर देखा तो उस स्थान पर एक प्राचीनकालीन शिवलिंग था. उन्होंने इसकी जानकारी गांव वालों को दी। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्रित हुए और उस शिवलिंग को अन्यत्र स्थापित करने के लिए ले जाने का प्रयास किया। अथक प्रयास के बाद भी ग्रामीण शिवलिंग को उठाने में असफल रहे। शिवलिंग को ले जाने में असफल रहे ग्रामीणों ने उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया।
जारगो महादेवबेड़ा मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष नवकुंज हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाता है. विख्यात नवकुंज हरिनाम संर्कितण का विश्राम होली के दिन होता है। महादेवबेड़ा में अब मंदिरों की श्रृंखला है। इस मंदिर प्रागंण में राधा कुंज स्थित है और इसके साथ ही राधा जी की अष्ठ सखियां रंगदेवी, सुदेवी, ललिता, विशाखा, चंपकलता, चित्रा, तुंग विद्या व इंदुलेखा के भी मंदिर हैं। इसके अलावा महाबली हनुमान मंदिर का भी निर्माण कराया गया है। प्रत्येक कुंज अपने आप में एक अलग ही खुबसूरती बटोरी हुई है, जो कि इस धाम की खुबसूरती में चार चांद लगाती है। यह धाम अपने आप में प्रकृति की एक अद्भुत देन है चारो तरफ वन-जंगल, नदी से घिरी हुई इसकी मनमोहक दृश्य लोगों को आनंदित करता है।


