जिला मत्स्य पदाधिकारी मो. कमरूज्जमा के नेतृत्व में मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता पर जोर
जमशेदपुर, 21 अगस्त : पूर्वी सिंहभूम जिले में मत्स्य पालन को रोजगार और आय का बेहतर साधन बनाने के साथ अब बतख पालन को भी इससे जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में पहल की जा रही है। जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी मो. कमरूज्जमा के नेतृत्व में विभागीय योजनाओं को लाभुकों तक पहुंचाने के साथ मत्स्य पालकों को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मत्स्य पालन के साथ बतख पालन को जोड़कर ग्रामीण परिवार एक ही तालाब या जलाशय से दोहरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। तालाब में मछली पालन के साथ उसके आसपास बतख पालन करने से अंडे और मांस के रूप में अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार होता है। वहीं, बतख से निकलने वाले जैविक अपशिष्ट का उपयोग तालाब की प्राकृतिक उत्पादकता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इससे मछली उत्पादन और बतख पालन को एकीकृत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।

प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी पर जोर
मत्स्य विभाग की ओर से मत्स्य पालकों को आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीक, तालाब प्रबंधन, मछलियों की देखभाल, रोग नियंत्रण और उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जानकारी देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही मछली पालन के साथ बतख पालन को जोड़कर ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विभागीय रिपोर्ट में विभिन्न मत्स्य योजनाओं के निर्धारित लक्ष्य और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है। एक गतिविधि में 290 के लक्ष्य के मुकाबले 229 की उपलब्धि दर्ज की गई है। विभाग का प्रयास है कि योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक योग्य लाभुकों तक पहुंचाया जाए और उन्हें तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाए।
मछली के साथ बतख पालन से बढ़ सकती है आमदनी
ग्रामीण क्षेत्रों में जिन परिवारों के पास तालाब या जलाशय उपलब्ध हैं, उनके लिए मछली और बतख पालन आय का उपयोगी माध्यम बन सकता है। मछली उत्पादन से जहां नियमित आमदनी का अवसर मिलता है, वहीं बतख पालन से अंडे और मांस की बिक्री के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है।
मत्स्य विभाग का उद्देश्य ग्रामीणों को केवल पारंपरिक तरीके से मत्स्य पालन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों को भी बढ़ावा देकर उनकी आय के स्रोतों का विस्तार करना है।
रोजगार के साथ आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
पूर्वी सिंहभूम में जल संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। यदि मछली पालन के साथ बतख पालन जैसी संबद्ध गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया जाए, तो ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त रोजगार और आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।
जिला मत्स्य पदाधिकारी मो. कमरूज्जमा के नेतृत्व में विभागीय योजनाओं की निगरानी, लाभुकों को प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। मत्स्य पालन, बतख पालन और अन्य संबद्ध गतिविधियों को एक साथ बढ़ावा देकर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।




