दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान की घोषणा, झामुमो ने जताया आभार, भारत रत्न की मांग दोहराई

रांची, 25 जनवरी : भारत सरकार ने झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा किया है। भारत सरकार के इस फैसले का झामुमो ने स्वागत किया है। केंद्र सरकार द्वारा रविवार को जारी पद्म पुरस्कारों की सूची में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु दिवंगत शिबू सोरेन का नाम शामिल किया है। यह सम्मान उनके जीवनपर्यंत सामाजिक संघर्ष और जनसेवा के लिए प्रदान किया गया है।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उन्होंने अन्याय, शोषण और सामाजिक विषमता के खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना। जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके जीवन का मूल मंत्र रहा। महाजनी शोषण, भूमि लूट और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उन्होंने व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया और आदिवासी समाज को संगठित कर अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी।
करीब चार दशकों तक दिशोम गुरु झारखंड आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, आठ बार सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं। 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका संघर्ष, विचार और आंदोलन आज भी जनमानस को प्रेरित कर रहा है।
झामुमो ने केंद्र सरकार के इस फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासी समाज को देश की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है। झामुमो ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान स्वागतयोग्य है, लेकिन गुरुजी के असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग जारी रहेगी।



