नर्सिंग इस्पात कंपनी में मजदूरी दर बढ़ाने व पीएफ-ईएसआईसी का लाभ देने पर फूटा मजदूरों का गुस्सा

चांडिल, 24 अगस्त : चांडिल प्रखंड के चौका थाना क्षेत्र के चौका-कांड्रा सड़पर किनारे खूंटी स्थित नर्सिंग इस्पात कंपनी में रविवार को मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दाैरान सैकड़ों मजदूरों ने एकजुट होकर बैठक की और कंपनी प्रबंधन पर शोषण का गंभीर आरोप लगाया। मजदूरों ने कहा कि उन्हें मात्र 280 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है, जो सरकारी दर से बेहद कम है। पीएफ और ईएसआईसी की सुविधा भी नहीं दी जा रही। इतना ही नहीं, मजदूरों का कहना है कि सरकार के आदेश का उल्लंघन करते हुए उन्हें साप्ताहिक छुट्टी तक नहीं दी जाती। मजदूरी दर बढ़ाने की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी मिलती है। विस्थापित और प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें कम दर पर काम कराया जा रहा है।
जेएलकेएम के नेतृत्व में मजदूरों की आवाज बुलंद
इस अवसर पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से बैठक का नेतृत्व केंद्रीय संगठन महासचिव फूलचांद महतो और जिला मीडिया प्रभारी प्रकाश कुमार महतो ने किया। सभी मजदूरों ने पार्टी के प्रतिनिधियों को तरुण महतो के नाम लिखित चिट्ठी देकर आवेदन सौंपा और न्याय की मांग की। मौके पर फूलचांद महतो ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कंपनी प्रबंधन मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा मजदूरों के हर हक और अधिकार के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
महिलाओं ने भी रोजगार की मांग की
बैठक में गांव की महिलाएं भी बड़ी संख्या में उपस्थित हुईं। मजदूर व महिलाओं ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नाम अलग से आवेदन सौंपा। महिलाओं ने कहा कि वे विस्थापित और प्रभावित परिवारों से हैं। कंपनी में 8 से 10 साल तक काम करने के बाद उन्हें हटा दिया गया। वे सभी चाहती हैं कि उन्हें भी फिर से काम दिया जाए। बैठक में अमित गोराई, राजीव महतो, बैकुंठ महतो, भोजू पांडे, किशोर महतो, शिबू सोरेन, हाड़ीराम मांझी, छोटू लाल, सुरेश महतो, नरेश महतो, माणिक महतो, बृहस्पति महतो, बनेश्वर महतो, भीम गोराई, रोहित महतो, जेएलकेएम पार्टी के केंद्रीय संगठन महासचिव फूलचांद महतो और जिला मीडिया प्रभारी प्रकाश कुमार महतो, चांडिल प्रखंड मीडिया प्रभारी दिलीप महतो के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण व मजदूर शामिल थे।



