दलमा के 135 गांवों का भविष्य दांव पर, पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभा की अनदेखी पर चिंता

चांडिल, 09 फरवरी : दलमा पहाड़ क्षेत्र से जुड़े चार प्रखंड के 135 गांवों के अधिकार और अस्तित्व पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र होने के बावजूद ग्रामसभा की सहमति के बिना दलमा क्षेत्र में लगातार योजनाएं लागू करने का प्रयास किया जा रहा है।
विकास, ईको टूरिज्म और ‘रन फॉर गजराज’ जैसे कार्यक्रमों के नाम पर दलमा पहाड़ को बार-बार मुद्दा बनाया जा रहा है, जिससे जंगल, जल, जमीन और स्थानीय समुदाय की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, पारंपरिक स्वशासन और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़ा मामला है।
इन्हीं चिंताओं को लेकर एक संयुक्त बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रस्तावित बैठक में ग्रामसभा प्रतिनिधि, पारंपरिक ग्राम प्रधान, मांझी, मुंडा, लाया, पाहन, समाज के नेतृत्वकर्ता, महिलाएं, युवा एवं पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों से जुड़े सामाजिक संगठन शामिल होंगे। बैठक की तिथि फिलहाल तय नहीं की गई है।
आयोजकों की ओर से सभी संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं, ताकि सर्वसम्मति से बैठक की तारीख तय कर आगे की रणनीति बनाई जा सके।
डॉ. एस. एन. मुर्मू ने कहा कि दलमा केवल एक पहाड़ नहीं, बल्कि सैकड़ों गांवों की पहचान, जीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ है, जिसकी रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है।



