रांची : खादगढ़ा में ‘भुईंहरी’ जमीन पर टकराव – बुलडोजर कार्रवाई के बाद सड़क पर उतरे लोग, भुगतान के दावे से बढ़ी सियासी-प्रशासनिक चुनौती

रांची, 11फरवरी : राजधानी के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र स्थित खादगाढ़ा शिव दुर्गा मंदिर के पास भुईंहरी प्रकृति की 48 डिसमिल जमीन पर बने मकानों को हटाने की कार्रवाई ने बुधवार को कानून-व्यवस्था और भूमि विवाद—दोनों मोर्चों पर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। एक ओर सरकारी अभिलेखों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, तो दूसरी ओर प्रभावित परिवारों का दावा है कि उन्होंने जमीन के लिए करोड़ों रुपये वैध तरीके से अदा किए हैं।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक टीम दंडाधिकारी, हेहल सीओ, सीआई और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। बुलडोजर की मौजूदगी से इलाके में तनाव बढ़ गया। विरोध के बीच एक मकान के अगले हिस्से को तोड़ा गया।
बुधवार को हालात और बिगड़ गए जब सैकड़ों लोग रातू रोड स्थित कब्रिस्तान के समीप सड़क पर उतर आए। टायर जलाकर मुख्य मार्ग जाम कर दिया गया, जिससे घंटों यातायात ठप रहा। प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर से घर खाली करने की घोषणा के बाद लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर कार्रवाई का विरोध किया। धक्का-मुक्की की स्थिति बनने पर पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया।
‘हमने जमीन खरीदी है’: भुगतान के दस्तावेज दिखा रहे परिवार
विवाद का नया पहलू तब सामने आया जब स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि 48 डिसमिल में से 38.25 डिसमिल जमीन पर वे वर्षों से रह रहे हैं और कथित खतियानी वंशज को प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से कुल 1,08,93,750 रुपये ऑनलाइन व बैंक ड्राफ्ट के जरिए भुगतान किया गया है। प्रभावित परिवारों—सीताराम चौधरी, गायत्री देवी, नारायण साव, फूलो देवी, महेश प्रसाद, मोहनलाल साहू, सुरेश साव और रामलखन यादव के परिजनों—ने लेन-देन के प्रमाण होने की बात कही है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन भुईंहरी प्रकृति की है, तो उस पर क्रय-विक्रय कैसे हुआ और पंजीकरण प्रक्रिया में क्या-क्या औपचारिकताएं पूरी की गईं? क्या राजस्व अभिलेखों की जांच हुई थी?
प्रशासन सख्त, लोग असमंजस में
शाम करीब 4:30 बजे प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि शेष संरचनाओं को हटाने की कार्रवाई अगले दिन की जाएगी और सभी परिवार रातभर में घर खाली कर दें। इस घोषणा के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। कई परिवारों के सामने रातोंरात बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई सरकारी जमीन की सुरक्षा और अवैध कब्जा हटाने के उद्देश्य से की जा रही है। वहीं स्थानीय लोग इसे वैध खरीददारों के साथ अन्याय बता रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि प्रभावित परिवार अब न्यायालय की शरण लेने की तैयारी में हैं। यदि भुगतान और दस्तावेजों की जांच में विसंगतियां सामने आती हैं, तो यह मामला सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्व और निबंधन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
फिलहाल खादगढ़ा इलाके में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रशासन अगली कार्रवाई के लिए तैयार है। जमीन, दस्तावेज और बुलडोजर—इन तीनों के बीच फंसे परिवारों की किस्मत अब कानूनी प्रक्रिया पर टिकी है।



